500 करोड़ का कारोबार कर झारखंड से गायब हुए 74 व्यापारी, वाणिज्यकर विभाग की जांच में चौंकाने वाला खुलासा

झारखंड में बड़े पैमाने पर कारोबार करने के बाद कई व्यापारी अपने पंजीकृत ठिकानों से गायब हो गए हैं। वाणिज्यकर विभाग की निगरानी शाखा की जांच में ऐसे 74 व्यापारी सामने आए हैं, जिन्होंने करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार किया, लेकिन सत्यापन के दौरान

झारखंड मंत्रालय
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  • झारखंड में बड़े पैमाने पर कारोबार करने के बाद कई व्यापारी अपने पंजीकृत ठिकानों से गायब हो गए हैं। वाणिज्यकर विभाग की निगरानी शाखा की जांच में ऐसे 74 व्यापारी सामने आए हैं, जिन्होंने करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार किया, लेकिन सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले।

रांची: झारखंड में बड़े पैमाने पर कारोबार करने के बाद कई व्यापारी अपने पंजीकृत ठिकानों से गायब हो गए हैं। वाणिज्यकर विभाग की निगरानी शाखा की जांच में ऐसे 74 व्यापारी सामने आए हैं, जिन्होंने करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार किया, लेकिन सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले। इस खुलासे के बाद वाणिज्यकर विभाग की निगरानी व्यवस्था और कारोबारियों के पंजीकरण को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच के दौरान अपने पते पर नहीं मिले व्यापारी

वाणिज्यकर विभाग की निगरानी शाखा ने निबंधित कारोबारियों के पते का सत्यापन करने के लिए जांच की। इस दौरान अधिकारियों को 74 ऐसे व्यापारी मिले, जो अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं थे।

विभाग के रिकॉर्ड में इन कारोबारियों का निबंधन दर्ज है और इनके जरिए बड़े स्तर पर कारोबार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। लेकिन जब विभागीय टीम ने वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पते की जांच की, तो वहां कारोबारी नहीं मिले।

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500 करोड़ रुपये के कारोबार से जुड़ा मामला

जांच में सामने आए 74 कारोबारियों का कुल कारोबार करीब 500 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इतनी बड़ी राशि के कारोबार के बाद कारोबारियों का अपने पंजीकृत ठिकानों से गायब मिलना वाणिज्यकर विभाग के लिए गंभीर विषय बन गया है।

अब विभाग की निगरानी शाखा इन कारोबारियों से जुड़े दस्तावेजों और कारोबार की गतिविधियों की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कारोबारियों ने किस तरह अपना निबंधन कराया और बाद में वे अपने घोषित पते से क्यों गायब हो गए।

हजारीबाग वाणिज्यकर प्रमंडल में सबसे ज्यादा मामले

इन मामलों में सबसे अधिक संख्या हजारीबाग वाणिज्यकर प्रमंडल से सामने आई है। इसका मतलब है कि लापता पाए गए कारोबारियों का बड़ा हिस्सा हजारीबाग प्रमंडल के अंतर्गत निबंधित था।

विभाग अब संबंधित प्रमंडलों से ऐसे कारोबारियों का रिकॉर्ड जुटाकर उनकी गतिविधियों की पड़ताल कर रहा है। जांच के दौरान कारोबारियों के पंजीकृत पते, व्यापार से संबंधित रिकॉर्ड और वाणिज्यकर से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।

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 पंजीकरण के बाद कारोबार, फिर ठिकाने से गायब

विभागीय जांच में सामने आए मामलों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित कारोबारियों ने निबंधित होने के बाद कारोबार किया। कारोबार का आंकड़ा करीब 500 करोड़ रुपये तक पहुंचने के बाद जब विभाग ने उनके पते का सत्यापन किया, तो कई व्यापारी वहां मौजूद नहीं मिले।

इस तरह के मामलों में विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती संबंधित कारोबारी तक पहुंचने और उसके वास्तविक कारोबार स्थल की जानकारी हासिल करने की होती है। इसी वजह से निगरानी शाखा ऐसे मामलों को गंभीरता से ले रही है।

विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

बड़े कारोबार से जुड़े कारोबारियों के अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिलने के बाद विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब किसी कारोबारी ने करोड़ों रुपये का कारोबार किया हो और बाद में सत्यापन के दौरान उसका पता ही सही नहीं मिले।

वाणिज्यकर विभाग अब ऐसे मामलों की पहचान कर रिकॉर्ड की जांच कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कारोबारियों ने नियमों के तहत कारोबार किया था या नहीं।

आगे और सामने आ सकते हैं मामले

74 कारोबारियों के सामने आने के बाद यह भी संभावना जताई जा रही है कि विभागीय जांच आगे बढ़ने पर ऐसे अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं। निगरानी शाखा अलग-अलग वाणिज्यकर प्रमंडलों में निबंधित कारोबारियों के पते और कारोबार से संबंधित जानकारी का सत्यापन कर रही है।

फिलहाल 500 करोड़ रुपये के कारोबार से जुड़े 74 कारोबारियों के अपने ठिकानों पर नहीं मिलने का मामला झारखंड के वाणिज्यकर विभाग के लिए जांच का अहम विषय बना हुआ है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही इन कारोबारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई और पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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