Patna: बिहार के पटना जिले के नौबतपुर में बुधवार रात एक दर्दनाक हादसे में दो मजदूरों की जान चली गई। शेखोपुर बधार में खेत की बोरिंग के लिए बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आने से दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों मजदूर ग्रीन सिटी साइट पर काम करते थे और रात में काम खत्म करने के बाद अपने ठिकाने की ओर लौट रहे थे। हादसा नौबतपुर थाना क्षेत्र के शेखोपुर बधार में हुआ। रात के अंधेरे में खेत के रास्ते से गुजरते समय दोनों मजदूर बिजली के तार के संपर्क में आ गए। करंट का झटका इतना तेज था कि उन्हें संभलने का मौका नहीं मिला।
सुबह खेत पहुंचे ग्रामीणों ने देखा शव
रात में घटना की जानकारी आसपास के लोगों को नहीं हो सकी। गुरुवार सुबह जब किसान और ग्रामीण खेतों की तरफ पहुंचे, तो उनकी नजर वहां पड़े दो शवों पर गई। इसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया और घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तत्काल नौबतपुर पुलिस को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की।
एक मजदूर की हुई पहचान, दूसरे की तलाश
पुलिस के अनुसार मृतकों में एक की पहचान जानीपुर थाना क्षेत्र के कोर्रा गांव निवासी 18 वर्षीय चिंटू कुमार के रूप में हुई है। दूसरे मृतक की पहचान अभी नहीं हो पाई है। पुलिस उसकी पहचान के लिए जानकारी जुटा रही है। पुलिस शुरुआती जांच में बिजली के तार की चपेट में आने को मौत की वजह मानकर मामले की पड़ताल कर रही है। हालांकि, हादसे की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।
खुले बिजली तार को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने खेतों में बिजली की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बोरिंग चलाने के लिए कई जगह तार खुले में या जमीन के काफी करीब बिछे रहते हैं। इससे किसानों, मजदूरों और खेतों से गुजरने वाले लोगों के लिए खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि खुले तारों की समस्या को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी, लेकिन सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। बुधवार रात हुई मौतों के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है।
मुआवजे और कार्रवाई की मांग पर अड़े ग्रामीण
हादसे के बाद ग्रामीणों ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया। उनकी मांग है कि मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिजली के तारों को सुरक्षित तरीके से लगाया गया होता, तो इस तरह की दुर्घटना को टाला जा सकता था। मौके पर पहुंची पुलिस ग्रामीणों को समझाने और स्थिति को सामान्य करने में जुटी रही।
किसने बिछाया था बिजली का तार? पुलिस कर रही जांच
अब पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि खेत में बिजली का तार किसने बिछाया था और उसमें बिजली की आपूर्ति किस माध्यम से की जा रही थी। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि तार खुले में क्यों पड़ा था और वहां सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए गए थे या नहीं। जांच के दौरान बिजली कनेक्शन की वैधता और बोरिंग संचालक समेत अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल हो सकती है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की जिम्मेदारी तय हो सकेगी।
खेतों में बिजली सुरक्षा पर उठे सवाल
नौबतपुर की घटना ने खेतों में बिजली के तारों की सुरक्षित व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खेतों में बोरिंग के लिए बिजली पहुंचाने की व्यवस्था यदि खुले और असुरक्षित तारों के जरिए की जाती है, तो यह किसानों और मजदूरों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। दूसरे मृतक की पहचान और बिजली के तार से जुड़े जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।



