Patna: बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। चार वर्षीय स्नातक शिक्षुता अंतर्निहित डिग्री कार्यक्रम यानी AFDP (Apprenticeship Embedded Degree Programme) के तहत सात नए पाठ्यक्रम शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के अंतर्गत आने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों को मंजूरी दे दी है। नई व्यवस्था 30 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इसके तहत विद्यार्थियों को चार साल की स्नातक डिग्री की पढ़ाई के साथ संबंधित क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप करने का मौका मिलेगा। इससे छात्रों को कक्षा में पढ़ाई के साथ वास्तविक कार्यक्षेत्र का अनुभव हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इन 7 नए पाठ्यक्रमों को मिली मंजूरी
AFDP के तहत अलग-अलग विषयों में नए विकल्प जोड़े गए हैं। इनमें कला, वाणिज्य और विज्ञान से जुड़े रोजगारपरक पाठ्यक्रम शामिल हैं।
- बीए: विषय-वस्तु एवं रचनात्मक लेखन
- बीकॉम: बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा
- बीकॉम: ई-कॉमर्स संचालन
- बीकॉम: मानव संसाधन संचालन
- बीकॉम: खुदरा संचालन
- बीएससी: स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन
- बीएससी ऑनर्स: इलेक्ट्रॉनिक्स, जिसमें डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स में मेजर तथा सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम/डेटा साइंस में माइनर का विकल्प होगा।
इन पाठ्यक्रमों की खासियत यह है कि इनमें पारंपरिक अकादमिक पढ़ाई के साथ संबंधित क्षेत्र की व्यावहारिक ट्रेनिंग को भी जोड़ा जाएगा।
डिग्री के साथ मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
AFDP का उद्देश्य उच्च शिक्षा को रोजगार की जरूरतों से जोड़ना है। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी अपने चुने हुए क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप कर सकेंगे। इससे छात्रों को डिग्री पूरी करने तक संबंधित क्षेत्र में काम करने का अनुभव मिल सकता है। बैंकिंग, ई-कॉमर्स, एचआर, रिटेल, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल क्षेत्र जैसे क्षेत्रों में यह व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
विश्वविद्यालयों को पूरी करनी होगी निर्धारित प्रक्रिया
नए AFDP पाठ्यक्रम सीधे शुरू नहीं किए जा सकेंगे। संबंधित विश्वविद्यालयों को पहले अपने वैधानिक निकायों से संशोधित अध्यादेश और विनियमों को मंजूरी दिलानी होगी। इसके लिए जहां आवश्यक होगा, वहां एकेडमिक काउंसिल, सिंडिकेट और सीनेट से भी स्वीकृति लेनी होगी। यानी नए पाठ्यक्रम लागू करने से पहले विश्वविद्यालयों को निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
त्रिपक्षीय एमओयू भी जरूरी
AFDP कार्यक्रम शुरू करने के लिए संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान को संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों के पैरा-10 के तहत त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) करना होगा। इसका मतलब है कि विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ निर्धारित समझौता और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद ही नए पाठ्यक्रमों को लागू किया जा सकेगा।
पहले से दाखिला ले चुके छात्रों को राहत
नई अधिसूचना में पहले से नामांकन करा चुके विद्यार्थियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। 27 मई 2026 की पूर्व अधिसूचना के आधार पर जिन विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है, उनका प्रवेश संशोधित चार वर्षीय अध्यादेश एवं विनियमों के तहत ही माना जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि पहले से दाखिला ले चुके छात्रों पर नए संशोधन का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनकी शैक्षणिक स्थिति को नई व्यवस्था के अनुरूप मान्यता दी जाएगी।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को मुख्य रूप से ये फायदे मिल सकते हैं:
- चार वर्षीय स्नातक डिग्री के साथ अप्रेंटिसशिप का अवसर।
- पढ़ाई के दौरान व्यावहारिक कार्य अनुभव।
- उद्योग और रोजगार की जरूरतों से जुड़े नए पाठ्यक्रम।
- बैंकिंग, ई-कॉमर्स, एचआर, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता का विकल्प।
- डिग्री पूरी होने तक कार्यक्षेत्र की बेहतर समझ।
बिहार में उच्च शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में AFDP के तहत शुरू किए जाने वाले ये पाठ्यक्रम एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखे जा रहे हैं। हालांकि, प्रत्येक विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम शुरू होने की प्रक्रिया संबंधित वैधानिक स्वीकृतियों और त्रिपक्षीय एमओयू पूरा होने के बाद ही आगे बढ़ेगी।




