Ranchi: झारखंड के JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अहम घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश वी मोहना ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। अब यह मामला उस पीठ के समक्ष नहीं सुना जाएगा, जिसमें न्यायाधीश वी मोहना शामिल होंगी। यह मामला झारखंड में कथित नियुक्ति अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग से जुड़ा है। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगम ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले में CBI जांच की मांग
हरिशरण देवगम की ओर से दाखिल जनहित याचिका में झारखंड की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में झारखंड सरकार, JPSC, JSSC, CID और CBI को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका का प्रमुख मुद्दा यह है कि नियुक्ति से जुड़े मामलों की जांच राज्य की एजेंसियों के बजाय केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए। इसी मांग को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
पहले नोटिस जारी कर चुका है सुप्रीम कोर्ट
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची और न्यायाधीश वी मोहना की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले में शामिल प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया था। नोटिस जारी होने के बाद न्यायाधीश वी मोहना ने इस मामले से खुद को अलग करने का फैसला लिया। इसके बाद अब इस जनहित याचिका की आगे की सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी।
क्यों अलग हुईं न्यायाधीश वी मोहना?
जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश बनने से पहले वकालत के दौरान वी मोहना ने झारखंड सरकार की ओर से कई मामलों में पैरवी की थी। इसी पूर्व पेशेवर जुड़ाव को देखते हुए उन्होंने JPSC-JSSC नियुक्ति घोटाले से संबंधित इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। न्यायिक प्रक्रिया में किसी मामले को लेकर संभावित हितों के टकराव या पूर्व पेशेवर जुड़ाव की स्थिति में न्यायाधीश का सुनवाई से अलग होना निष्पक्षता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। न्यायाधीश वी मोहना के मामले से हटने के बाद अब याचिका की सुनवाई ऐसी पीठ के समक्ष होगी, जिसमें वह शामिल नहीं होंगी। नई पीठ मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। JPSC-JSSC नियुक्ति से जुड़े मामलों को लेकर झारखंड में पहले से ही अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों की ओर से पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठती रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल यह याचिका आगे किस दिशा में बढ़ती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।




