Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन के बाद झारखंड के सरकारी चिकित्सकों ने अपने आंदोलन के कार्यक्रम में तीन दिनों का विराम देने का फैसला किया है। झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (झासा) ने संवेदनशीलता दिखाते हुए 9 अक्टूबर को प्रस्तावित काला बिल्ला कार्यक्रम और अगले दो दिनों के जनसंपर्क अभियान को स्थगित कर दिया है। हालांकि, चिकित्सकों की मांगों को लेकर आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। झासा ने साफ किया है कि 22 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार फिलहाल यथावत रहेगा। सरकार की ओर से मांगों पर ठोस पहल नहीं होने पर राज्यभर के करीब 1200 सरकारी चिकित्सक इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।
रूपी सोरेन के निधन पर आंदोलन में तीन दिन का विराम
झासा के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 9 अक्टूबर को सरकारी चिकित्सकों को काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी करनी थी। इसके जरिए चिकित्सक अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराने वाले थे। रूपी सोरेन के निधन के बाद संघ ने इस कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा अगले दो दिनों के लिए प्रस्तावित जनसंपर्क अभियान भी नहीं होगा। झासा ने कहा है कि इस अवधि में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए शोक की गरिमा बनाए रखी जाएगी।
22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार
तीन दिनों के विराम के बावजूद झासा ने अपने आंदोलन की आगे की रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया है। संघ के अनुसार, यदि सरकार चिकित्सकों की लंबित मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन में राज्य के करीब 1200 सरकारी चिकित्सकों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में सरकार और चिकित्सक संगठन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या हैं सरकारी चिकित्सकों की प्रमुख मांगें?
झासा लंबे समय से चिकित्सकों की सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहा है। संघ की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एसीपी, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, संविदा नियुक्ति नियमावली में बदलाव और सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। चिकित्सक संगठन का कहना है कि इन मांगों पर लंबे समय से चर्चा हो रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं निकल पाया है। इसी वजह से संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
सरकार के रुख पर टिकी आगे की रणनीति
फिलहाल झासा ने आंदोलन के तत्काल कार्यक्रमों को तीन दिनों के लिए रोक दिया है। इसके बाद पूर्व निर्धारित कार्यक्रम फिर शुरू होंगे। वहीं, 22 अक्टूबर की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार की ओर से होने वाली पहल अहम होगी। अगर सरकार और झासा के बीच बातचीत के जरिए मांगों पर सहमति बनती है तो आंदोलन को टाला जा सकता है। फिलहाल संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि 22 अक्टूबर का कार्य बहिष्कार वापस नहीं लिया गया है।



