New Delhi: जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने युवाओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किए जाने और मेट्रो के 57 स्टेशनों को बंद रखने की खबरों के बीच उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को कोई रोक नहीं सकता। युवा अपनी राह खुद बना सकते हैं और उनमें दुनिया को दिशा दिखाने की क्षमता है। हरियाणा के सोनीपत में एक शैक्षणिक संस्थान के कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में चिराग पासवान ने सवाल उठाया कि आखिर युवाओं की आवाज को रोकने के लिए कितनी ट्रेनें और कितने रास्ते बंद किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोकने की कोशिश करने वालों को यह समझना चाहिए कि उनकी क्षमता और संकल्प को सीमित नहीं किया जा सकता।
‘युवाओं को रोकने की कोशिश करना गलतफहमी’
चिराग पासवान ने कहा कि भारत के युवा अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर आगे बढ़ने की क्षमता रखते हैं। उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले लोगों को समझना चाहिए कि परिवहन के साधनों या रास्तों पर पाबंदियां लगाने से युवाओं की आवाज खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने पिछली पीढ़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के युवाओं में दुनिया को रास्ता दिखाने की ताकत है। उनका मानना है कि युवाओं को अपनी बात रखने और अपने विचार सामने रखने का अवसर मिलना चाहिए। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उनके इस बयान को युवाओं की भागीदारी और विरोध-प्रदर्शन के अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है।
#WATCH | Sonipat, Haryana: On the cancellation of trains, Union Minister Chirag Paswan says, “These are the youth of India—nothing can stop them. To those attempting to spread such misconceptions, I ask: how many trains can anyone really stop? How much connectivity can be blocked? How many roads can be jammed? These are India’s youth; they possess the capacity to show the world the way—just as previous generations have done—and so, nothing can hold them back.”
— ANI (@ANI) October 9, 2026
विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा, बातचीत भी जरूरी
सोनीपत के कुंडली स्थित निफ्टम संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में विरोध-प्रदर्शन होना स्वाभाविक है। लोगों को अपनी मांगें और समस्याएं सरकार के सामने रखने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने बातचीत को समस्या के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। चिराग पासवान के अनुसार, प्रदर्शन कब किया जा रहा है, यह अलग विषय है, लेकिन किसी भी विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं का दिल्ली पहुंचकर अपने सुझाव रखना भी महत्वपूर्ण है। उनके विचारों से सहमति हो या असहमति, उनकी बात सुनने और चर्चा करने का रास्ता खुला रहना चाहिए।
चुनावी प्रक्रिया पर भी चिराग पासवान ने दी सलाह
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से एक दिन पहले चिराग पासवान ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को भी निर्वाचन आयोग से बातचीत करने की सलाह दी थी। लखनऊ में अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित शोकसभा के दौरान उन्होंने कहा था कि राजनीतिक दलों को अपनी चिंताओं के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने माना कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर राजनीतिक दल का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्षी दल वास्तव में अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं या केवल विरोध-प्रदर्शन के जरिए राजनीतिक माहौल बनाना चाहते हैं।
निर्वाचन आयोग से मिलकर सवाल रखने की अपील
चिराग पासवान ने निर्वाचन आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि राजनीतिक दल उसके सामने अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं। वे आयोग से मुलाकात का समय मांग सकते हैं और प्रतिनिधिमंडल के साथ जाकर अपने सवालों के जवाब मांग सकते हैं। उनके मुताबिक, विरोध जताने के साथ-साथ बातचीत के विकल्प को भी महत्व दिया जाना चाहिए। इससे संबंधित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है और समाधान तक पहुंचने का रास्ता निकल सकता है।
दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन पर नजर
जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़ी तैयारियों की चर्चा के बीच चिराग पासवान का बयान सामने आया है। उन्होंने एक ओर युवाओं की ताकत और उनकी आवाज को अहम बताया, तो दूसरी ओर लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की जरूरत पर जोर दिया। अब इस प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन की व्यवस्था और संबंधित पक्षों की आगे की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।




