Patna: बिहार में शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के वेतन भुगतान की जांच के बाद अब पुलिस महकमे में भी वेतन और भत्तों की पड़ताल की जाएगी। वित्त विभाग ने पुलिस मुख्यालय समेत गृह विभाग के अधीन कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और सिपाहियों के वेतन से जुड़े आंकड़ों का सत्यापन करने का निर्देश दिया है। पटना पुलिस के वेतन भुगतान में विसंगतियां सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। जांच में अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ अतिरिक्त भुगतान की राशि भी वसूल की जाएगी।
अक्टूबर के वेतन भुगतान से पहले जांच जरूरी
वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने इस संबंध में गृह विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, अक्टूबर महीने के वेतन और भत्तों से जुड़े आंकड़ों की जांच भुगतान से पहले पूरी करनी होगी। सत्यापन के बाद ही नवंबर में अक्टूबर महीने का वेतन जारी किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य वेतन भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता को रोकना है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन और भत्ते मिल रहे हैं या नहीं।
ई-एचआरएमएस पोर्टल पर जांच में मिली गड़बड़ी
सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों का भुगतान ई-एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से किया जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की पड़ताल के दौरान पटना जिले के पुलिस महकमे में भुगतान से संबंधित कुछ विसंगतियां सामने आई हैं। इसके बाद वित्त विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और सिपाहियों के वेतन संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि भुगतान में अंतर किस स्तर पर हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। केवल आंकड़ों की जांच ही नहीं, बल्कि वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा भी की जाएगी।
मेकर, चेकर और एप्रूवर की तय होगी जिम्मेदारी
वित्त विभाग ने वेतन भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े सभी स्तरों पर जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। इसके तहत तीन प्रमुख भूमिकाओं की जांच की जाएगी।
- मेकर: वेतन और भत्तों से संबंधित आंकड़े तैयार करने वाला कर्मचारी।
- चेकर: तैयार किए गए आंकड़ों की जांच करने वाला अधिकारी या कर्मचारी।
- एप्रूवर: भुगतान को अंतिम मंजूरी देने वाला जिम्मेदार अधिकारी।
अगर जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर अनियमितता किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गलत भुगतान होने पर होगी राशि की वसूली
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित राशि से अधिक या गलत तरीके से वेतन-भत्तों का भुगतान होने पर उसकी वसूली की जाएगी। मामले की गंभीरता के अनुसार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासनिक या आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। इस निर्देश के बाद पुलिस विभाग में वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी राशि के भुगतान में विसंगतियां हैं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
शिक्षा विभाग के बाद पुलिस महकमे की बारी
पुलिस विभाग से पहले वित्त विभाग शिक्षा विभाग में भी वेतन और भत्तों की शत-प्रतिशत जांच का निर्देश दे चुका है। इसके लिए शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखा गया था। जांच के दायरे में स्कूलों के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और विभाग के संबंधित पदाधिकारी शामिल हैं। उच्च शिक्षा विभाग को इस प्रक्रिया से अलग रखा गया है। शिक्षा विभाग में भी अक्टूबर के वेतन भुगतान से पहले आंकड़ों का सत्यापन करने और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई व वसूली सुनिश्चित करने को कहा गया है। कुल मिलाकर, बिहार में सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान की निगरानी अब सख्त की जा रही है। पुलिस और शिक्षा विभाग में रिकॉर्ड की जांच के जरिए भुगतान संबंधी विसंगतियों का पता लगाने, जिम्मेदारी तय करने और सरकारी धन के गलत इस्तेमाल को रोकने पर जोर दिया जा रहा है।



