Buxar: बिहार के बक्सर में नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा की अदालत ने दो दोषियों मुन्ना नट और गणेश नट उर्फ जतहा नट को प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को 18 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। वहीं, तीसरे दोषी जगत नट को जेल में बिताई गई अवधि के बराबर सजा सुनाते हुए एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह मामला वर्ष 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली एक नाबालिग लड़की को बिहार लाकर बंधक बनाए जाने और उसके साथ यौन अपराध किए जाने का आरोप लगा था। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने दो आरोपियों को गंभीर अपराधों में दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई।
बक्सर पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद
विशेष पॉक्सो न्यायालय ने मुन्ना नट और गणेश नट उर्फ जतहा नट को दुष्कर्म के मामले में प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि तक जेल में रखने की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त मारपीट, बंधक बनाने, अपहरण और अन्य संबंधित अपराधों में भी दोनों को अलग-अलग सजाएं दी गई हैं। अदालत ने संबंधित धाराओं के तहत दोनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है। प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी दी गई है। न्यायालय के आदेश के अनुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके साथ ही पीड़िता को 18 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला मामले की गंभीरता और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वर्ष 2013 में सामने आया था मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली थी। वर्ष 2013 में उसे बेहोशी की हालत में बिहार के सोनवर्षा इलाके में लाया गया था। आरोप था कि इसके बाद उसे एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया और उसके साथ जबरन यौन संबंध बनाए गए। मामले में यह आरोप भी लगाया गया था कि पीड़िता ने जब वहां से भागने की कोशिश की, तो उसे गर्म लोहे से जलाया गया। घटना के संबंध में नावानगर थाना क्षेत्र के सोनवर्षा ओपी में पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोपों को साबित करने के लिए कुल 15 गवाह पेश किए। सुनवाई के दौरान एक अन्य आरोपित शांति देवी की मृत्यु हो गई थी।
तीसरे दोषी जगत नट को जेल में बिताई अवधि की सजा
इस मामले में तीसरे दोषी जगत नट को भारतीय दंड संहिता की धारा 368 के तहत जेल में बिताई गई अवधि के बराबर सजा सुनाई गई है। अदालत ने उस पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उसे एक महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने जगत नट को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि, यह रिहाई तभी प्रभावी होगी, जब वह किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हो।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए 15 गवाह
विशेष लोक अभियोजक सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के माध्यम से अपना पक्ष रखा। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने दो दोषियों को प्राकृतिक जीवन की शेष अवधि तक उम्रकैद की सजा सुनाई और पीड़िता के लिए 18 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया। इस फैसले के साथ मामले में दोषियों की सजा और पीड़िता को आर्थिक सहायता देने के संबंध में अदालत ने अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया है।




