टाटा स्टील को बड़ा झटका! याचिका खारिज, अब जमा करने होंगे 11.82 करोड़ रुपये… जानें क्या है पूरा मामला

झारखंड विद्युत नियामक आयोग ने टाटा स्टील की याचिका खारिज कर दी है। कंपनी को पुराने आरपीओ बकाये के रूप में 11.82 करोड़ रुपये जमा करने होंगे।
टाटा स्टील
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Jamshedpur: झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) ने टाटा स्टील लिमिटेड को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2013-14 के बीच नवीकरणीय ऊर्जा खरीद दायित्व (RPO) पूरा नहीं करने के मामले में कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि टाटा स्टील को 11,82,29,146 रुपये जमा करने होंगे। तय समय में राशि जमा नहीं करने पर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

को-जेनरेशन प्लांट को लेकर था विवाद

यह मामला टाटा स्टील के कैप्टिव पावर प्लांट को सह-उत्पादन यानी को-जेनरेशन संयंत्र का दर्जा देने और इसके आधार पर आरपीओ दायित्वों से छूट पाने की मांग से जुड़ा है। आरपीओ के तहत संबंधित बिजली कंपनियों और संस्थाओं को निर्धारित नियमों के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद या उससे जुड़े दायित्वों को पूरा करना होता है। टाटा स्टील ने पुराने वित्तीय वर्षों के लिए इस दायित्व में राहत देने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने कंपनी की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

जीवाश्म ईंधन से बनी बिजली पर नहीं मिलेगी छूट

सुनवाई के दौरान आयोग ने इलेक्ट्रिसिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (APTEL) के फैसले का हवाला दिया। इस फैसले के अनुसार, जीवाश्म ईंधन से चलने वाले सह-उत्पादन संयंत्रों से बनने वाली बिजली को नवीकरणीय ऊर्जा के बराबर नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर आयोग ने कहा कि ऐसे संयंत्रों को आरपीओ दायित्व से छूट या किसी तरह का समायोजन देने का आधार नहीं बनता। आयोग ने इसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए टाटा स्टील की याचिका खारिज कर दी।

बाद के वर्षों के अतिरिक्त आरपीओ का लाभ भी नहीं मिलेगा

टाटा स्टील ने सुनवाई के दौरान एक और मांग रखी थी। कंपनी का कहना था कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2019-20 के बीच आरपीओ के तहत किए गए अतिरिक्त अनुपालन को पुराने बकाये के विरुद्ध समायोजित किया जाए। हालांकि, आयोग ने इस दलील को भी खारिज कर दिया। आयोग के अनुसार, नियमों में भविष्य के वर्षों में किए गए अतिरिक्त अनुपालन को पिछले वर्षों की देनदारी के बदले पुराने प्रभाव से समायोजित करने का प्रावधान नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने मात्र से एपटेल का आदेश निष्प्रभावी नहीं हो जाता। जब तक किसी सक्षम अदालत से रोक या स्थगन आदेश नहीं मिलता, तब तक संबंधित आदेश का पालन करना जरूरी है।

जरेडा की गणना को आयोग की मंजूरी

झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (JREDA) की ओर से पेश की गई गणना और आंकड़ों को आयोग ने सही माना है। इसके बाद टाटा स्टील को कुल 11,82,29,146 रुपये झारखंड आरपीओ चार्ज रेगुलेटरी फंड के इंडियन बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है। इस राशि का इस्तेमाल नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र (REC) खरीदने के लिए किया जाएगा। आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस नवनीत कुमार और विधि सदस्य महेंद्र प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया है। आयोग ने साफ किया है कि निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं करने पर कंपनी के खिलाफ लागू नियमों के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले से स्पष्ट है कि पुराने आरपीओ दायित्वों को पूरा करने में नियमों के पालन और समय पर भुगतान को लेकर आयोग सख्त रुख अपना रहा है।

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