New Delhi: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और केंद्र सरकार से मंदिर में प्राप्त दान की राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी अपील की। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की ओर से दिए गए धन के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी है।
राम मंदिर के दान पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयराम रमेश ने राम मंदिर के लिए जुटाई गई दान राशि और चढ़ावे से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े किए। उनका दावा है कि वर्ष 2021 में निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान के माध्यम से 3,264 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। कांग्रेस नेता ने मांग की कि मंदिर को मिले दान, चढ़ावे और अन्य आर्थिक योगदान का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को यह जानकारी मिल सके कि उनके योगदान का हिसाब किस तरह रखा जा रहा है। हालांकि, दान के प्रबंधन में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जवाब सामने आना जरूरी है। केवल सवाल उठाए जाने के आधार पर वित्तीय गड़बड़ी को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
₹82.78 करोड़ के चढ़ावे के आंकड़े पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच कथित तौर पर प्राप्त 82.78 करोड़ रुपये के चढ़ावे के आंकड़े का उल्लेख किया। उन्होंने श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या का हवाला देते हुए पूछा कि मंदिर में आने वाले लोगों की संख्या और दर्ज चढ़ावे की राशि के बीच संबंध को किस तरह समझा जाए। इस मुद्दे पर दान और चढ़ावे की गणना की अवधि, अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त योगदान तथा राशि दर्ज करने की प्रक्रिया जैसे पहलुओं की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इन विवरणों के आधार पर ही आंकड़ों का सही संदर्भ समझा जा सकता है।
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प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर भी उठाए सवाल
जयराम रमेश ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए यहां प्राप्त दान के प्रबंधन में पारदर्शिता होनी चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और वित्तीय विवरण सार्वजनिक किए जाएं। इससे दान की राशि और उसके प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा।
दान के हिसाब में पारदर्शिता क्यों जरूरी?
धार्मिक स्थलों को श्रद्धालुओं से बड़ी मात्रा में दान और चढ़ावा मिलता है। ऐसे में आय, खर्च और धन के प्रबंधन से जुड़ी स्पष्ट जानकारी संस्थागत जवाबदेही को मजबूत कर सकती है। राम मंदिर के मामले में भी आरोपों और राजनीतिक सवालों से अलग, आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों तथा संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल जयराम रमेश ने दान के पूरे हिसाब को सार्वजनिक करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
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