Bokaro/Ranchi: झारखंड में कोयले की अनियमित आपूर्ति का असर अब बिजली उत्पादन और सप्लाई पर दिखने लगा है। बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड (BPSCL) के पास महज तीन दिन का कोयला स्टॉक बचा है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) से नियमित रूप से कोयला नहीं मिलने के कारण प्लांट के संचालन पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर बोकारो स्टील प्लांट (BSL) और टाउनशिप की बिजली आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। मंगलवार को बोकारो टाउनशिप में रोटेशन के आधार पर बिजली कटौती की गई। कोयले की कमी के बीच बिजली उत्पादन घटने से औद्योगिक गतिविधियों और आम लोगों की बिजली जरूरतों को पूरा करना चुनौती बनता जा रहा है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि अगर जल्द ही कोयले की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो बिजली संकट और गहरा सकता है।
BPSCL के पास केवल तीन दिन का कोयला बचा
बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती कोयले का सीमित भंडार है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुधीर व्यास के मुताबिक, प्लांट को सामान्य रूप से चलाने के लिए प्रतिदिन करीब 4,000 टन कोयले की जरूरत होती है। पहले कंपनी को हर दिन कोयले की एक पूरी रैक मिलती थी। लेकिन अब आपूर्ति का अंतर बढ़ गया है और कोयले की खेप दो से तीन दिनों के अंतराल पर पहुंच रही है। इससे प्लांट के पास पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना मुश्किल हो गया है। कोयले की नई खेप समय पर नहीं पहुंचने की स्थिति में बिजली उत्पादन में और गिरावट आ सकती है। ऐसे में कंपनी के लिए उपलब्ध संसाधनों के आधार पर बिजली उत्पादन और वितरण का प्रबंधन करना जरूरी हो गया है।
बिजली उत्पादन 190 MW से घटकर 130-150 MW पर पहुंचा
BPSCL में बिजली उत्पादन घटने से बोकारो स्टील प्लांट और आसपास की टाउनशिप में आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले संयुक्त उपक्रम के इस प्लांट में बिजली उत्पादन करीब 190 मेगावाट था, जो अब घटकर लगभग 130 से 150 मेगावाट रह गया है। बोकारो स्टील प्लांट को अपने औद्योगिक संचालन के लिए लगभग 240 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है। वहीं, टाउनशिप की मांग करीब 55 मेगावाट है। इन जरूरतों को BPSCL और दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) के माध्यम से पूरा किया जाता है। उत्पादन में कमी के कारण बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इसका सीधा असर बिजली वितरण की व्यवस्था पर पड़ रहा है।
बोकारो टाउनशिप में रोटेशन के आधार पर बिजली कटौती
कोयले की अनियमित आपूर्ति और घटते बिजली उत्पादन को देखते हुए बोकारो टाउनशिप में रोटेशन के आधार पर बिजली कटौती की गई। इसका उद्देश्य उपलब्ध बिजली को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटना है, ताकि किसी एक इलाके को लंबे समय तक बिजली से वंचित न रहना पड़े। कंपनी की ओर से चरणबद्ध तरीके से बिजली कटौती की व्यवस्था अपनाई जा रही है। इससे लोगों को बिजली उपलब्ध रहने के दौरान इनवर्टर चार्ज करने जैसे जरूरी कामों के लिए समय मिल सके। हालांकि, यदि कोयले की आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं होता है, तो बिजली कटौती की समस्या आगे भी बनी रह सकती है।
मानसून में खदानों में जलजमाव से प्रभावित हुई कोयले की आपूर्ति
कोयले की कमी के पीछे मानसून के दौरान खनन और परिवहन में आई बाधाओं को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। CCL की खुली खदानों में जलजमाव के कारण कोयला उत्पादन और डिस्पैच प्रभावित हुए हैं। इसका असर बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों तक कोयला पहुंचने पर पड़ा है। इससे पहले सितंबर में बोकारो के ललपनिया स्थित तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (TVNL) में भी कोयले की कमी का संकट सामने आया था। उस समय TVNL प्रबंधन ने राज्य सरकार और CCL के अधिकारियों को पत्र लिखकर कोयले की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की थी। लगातार सामने आ रही ऐसी स्थितियां बताती हैं कि कोयले की आपूर्ति में व्यवधान का असर केवल एक बिजली संयंत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
कोयले की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो बढ़ सकता है संकट
BPSCL प्रबंधन ने संबंधित कोयला कंपनियों से आपूर्ति सामान्य करने का आग्रह किया है। फिलहाल कंपनी के सामने सीमित स्टॉक के बीच बिजली उत्पादन और आपूर्ति को बनाए रखने की चुनौती है। अगर जल्द ही कोयले की पर्याप्त खेप नहीं पहुंचती है, तो उत्पादन में और कमी आ सकती है। इससे बोकारो टाउनशिप में बिजली कटौती बढ़ने के साथ बोकारो स्टील प्लांट के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका है।



