Torpa: झारखंड के खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड में गौवंश तस्करी की आशंका का मामला सामने आया है। बोतलों गांव के पास छाता नदी के किनारे झाड़ियों में ले जाए जा रहे 10 गौवंश को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। घटना की जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। इसके बाद गौवंश को सुरक्षित किया गया और मामले की सूचना संबंधित प्रशासन को दी गई। फिलहाल, गौवंश कहां से लाए गए थे और इस मामले में कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच की जा रही है।
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छाता नदी के किनारे झाड़ियों में मिले 10 गौवंश
जानकारी के अनुसार, तोरपा प्रखंड के बोतलों गांव के समीप छाता नदी के किनारे झाड़ियों में 10 गौवंश को देख ग्रामीणों को संदेह हुआ। ग्रामीणों ने बोतलों और कुदरी गांव के लोगों के सहयोग से गौवंश को पकड़ा। इसके बाद मामले की जानकारी बजरंग दल के जिला संयोजक कर्मवीर महतो को दी गई। सूचना मिलने पर कर्मवीर महतो के नेतृत्व में बजरंग दल की स्थानीय टीम घटनास्थल पर पहुंची। मौके पर जिला सह संयोजक प्रकाश अधिकारी, मनोरंजन सांसी, ओम ठाकुर और आदित्य महतो समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे। दोनों गांवों के करीब 50 ग्रामीण भी घटनास्थल पर पहुंचे। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की मदद से गौवंश को सुरक्षित किया गया। इसके बाद संबंधित प्रशासन को सूचना दी गई, ताकि मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जा सके।
पहले भी पकड़े गए थे 8 गौवंश
तोरपा के इसी क्षेत्र में गौवंश तस्करी की आशंका से जुड़ा मामला पहले भी सामने आ चुका है। जानकारी के मुताबिक, 14 अगस्त को कर्मवीर महतो के नेतृत्व में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसी इलाके में आठ गौवंश पकड़े थे। उस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लगातार ऐसे मामले सामने आने से क्षेत्र में गौवंश के अवैध परिवहन को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, मौजूदा घटना में गौवंश को कहां से लाया गया था और उन्हें किस स्थान पर ले जाने की योजना थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
गौवंश तस्करी पर रोक लगाने की मांग
बजरंग दल के जिला संयोजक कर्मवीर महतो ने कहा कि क्षेत्र में गौवंश तस्करी की सूचना मिलने पर ग्रामीणों के सहयोग से प्रशासन को जानकारी दी जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी स्वयं कानून हाथ में लेने के बजाय संबंधित अधिकारियों को दें। फिलहाल, तोरपा में पकड़े गए 10 गौवंश के मामले में प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण है। जांच के जरिए यह पता लगाया जाना है कि गौवंश कहां से लाए गए थे और उनके परिवहन में किसी कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं। जांच के तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।




