गया पितृपक्ष मेले में 12 साल से जारी सेवा, पंजाब की टीम रोजाना 8 से 10 हजार श्रद्धालुओं को करा रही भोजन

पंजाब की टीम 12 साल से गयाजी में लंगर चला रही है। रोज 8-10 हजार श्रद्धालुओं को चाय, नाश्ता और भोजन कराया जाता है।
गया पितृपक्ष मेले में 12 साल से जारी सेवा
Advertisement

Gaya Pitru Paksha Mela: पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से गयाजी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए पंजाब की एक टीम पिछले 12 वर्षों से लगातार लंगर सेवा चला रही है। वर्ष 2014 में शुरू हुई यह पहल अब हजारों तीर्थयात्रियों के लिए भोजन और सेवा का महत्वपूर्ण सहारा बन चुकी है। करीब 18 से 19 दिनों तक चलने वाले इस लंगर में हर दिन हजारों श्रद्धालुओं को नि:शुल्क भोजन कराया जाता है।

एक अनुभव ने शुरू कराई लंगर सेवा

लंगर सेवा से जुड़े पंजाब निवासी विजय गुप्ता बताते हैं कि वह वर्ष 2013 में पिंडदान और पूजा के लिए गयाजी आए थे। उस दौरान पूजा-पाठ में पूरा दिन बीतने के बाद उन्हें भोजन के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उनके मन में दूसरे श्रद्धालुओं की परेशानी कम करने का विचार पैदा किया। उन्होंने अपने तीन-चार दोस्तों से इस बारे में चर्चा की और सभी ने मिलकर गयाजी में लंगर शुरू करने का निर्णय लिया। दोस्तों ने आपस में सहयोग राशि जुटाई और अगले वर्ष यानी 2014 में पहली बार पितृपक्ष मेले के दौरान लंगर सेवा शुरू की गई। इसके बाद यह सेवा हर साल निरंतर जारी है।

सुबह की चाय से लेकर दिनभर भोजन की व्यवस्था

गयाजी में चलने वाले इस लंगर में श्रद्धालुओं के लिए दिन की शुरुआत चाय से होती है। टीम के अनुसार, सुबह करीब 5 बजे चाय, 8 बजे नाश्ता और इसके बाद दिनभर भोजन उपलब्ध कराया जाता है। रोजाना करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु यहां भोजन करते हैं। पंजाब से आए हलवाई और सेवा में जुटी टीम मिलकर भोजन तैयार करती है। लंगर में पंजाबी शैली के कई व्यंजन श्रद्धालुओं को परोसे जाते हैं।

लंगर में मिलने वाले प्रमुख व्यंजन

  • पराठा
  • कढ़ी
  • राजमा
  • चावल
  • नाश्ता और चाय
  • अन्य पारंपरिक भोजन

टीम का कहना है कि अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन के लिए किसी तरह की परेशानी न हो, यही इस सेवा का मुख्य उद्देश्य है।

76 साल की उम्र में भी सेवा से जुड़े हैं रामप्रकाश

लंगर सेवा में उम्र भी किसी के उत्साह को कम नहीं कर पाई है। 76 वर्षीय रामप्रकाश गुप्ता वर्ष 2018 से इस सेवा का हिस्सा हैं। टीम के सबसे वरिष्ठ सदस्यों में शामिल रामप्रकाश आज भी लंगर की व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान देते हैं। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद घर पर खाली बैठने के बजाय साथियों के साथ गयाजी आकर श्रद्धालुओं की सेवा करना उन्हें अधिक अच्छा लगा। इसके बाद से वह हर साल पितृपक्ष के दौरान यहां पहुंचते हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

बिना भेदभाव श्रद्धालुओं की सेवा

पितृपक्ष के दौरान गयाजी में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में भोजन की व्यवस्था कई श्रद्धालुओं के लिए बड़ी जरूरत बन जाती है। पंजाब की यह टीम करीब 18 से 19 दिनों तक लंगर चलाकर श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के भोजन उपलब्ध कराती है। 12 वर्षों से जारी यह सेवा अब पितृपक्ष मेले की उन पहलों में शामिल हो गई है, जो धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत करती हैं।

सेवा का सिलसिला लगातार जारी

2014 में कुछ दोस्तों की छोटी-सी पहल से शुरू हुआ यह लंगर अब बड़े स्तर पर श्रद्धालुओं की मदद कर रहा है। हर साल पंजाब से टीम गयाजी पहुंचती है और पितृपक्ष मेले के दौरान भोजन तैयार करने से लेकर उसे श्रद्धालुओं तक पहुंचाने तक की जिम्मेदारी संभालती है। सेवा की यह निरंतरता इसे खास बनाती है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.