Ranchi : वनवासी कल्याण केंद्र द्वारा रांची स्थित आरोग्य भवन, बरियातू रोड में भव्य सरहुल मिलन समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन जनजातीय परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव को समर्पित रहा, जिसमें उरांव, मुंडारी और नागपुरी नृत्य टोलियों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमुदाय को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान जनजातीय पाहनों का पारंपरिक सम्मान किया गया, साथ ही अपनी संस्कृति, परंपरा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले युवाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
विशिष्ट अतिथि पद्मश्री अशोक भगत (संस्थापक, विकास भारती) ने सरहुल पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा यह महापर्व न केवल आनंद और उल्लास का प्रतीक है, बल्कि यह हमें प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देता है। आधुनिकता की होड़ में प्रकृति का हो रहा शोषण चिंतनीय है, और हमें आदिवासी समाज से सीख लेकर पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्पित होना होगा।

मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री ने जानकारी दी कि आश्रम पिछले 70 वर्षों से देशभर के 550 से अधिक जनजातीय समुदायों के बीच 21,829 सेवा प्रकल्पों के माध्यम से सक्रिय है। उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ बोर्ड के नए प्रावधानों से जनजातीय क्षेत्र को बाहर रखने हेतु जेपीसी से आग्रह किया गया, जिसे संसद में भी प्रस्तुत किया गया।
प्रारंभिक भाषण में क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रफुल्ल अकांत ने कहा सरहुल रिश्तों को निभाने, प्रकृति से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का पर्व है। पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्र इसकी आत्मा हैं, जिन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. तनुजा मुंडा ने किया, जबकि अध्यक्ष सुदान मुंडा ने स्वागत भाषण और महामंत्री धनंजय सिंह ने अतिथियों का परिचय दिया। धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष सज्जन सर्राफ द्वारा किया गया।
इस गरिमामयी अवसर पर रीझु कच्छप, सुशील मरांडी, मेघा उरांव, रोशनी खलखो, संदीप उरांव, पूनम पूर्ति, जिज्ञासा ओझा, पवन मंत्री, पूनम गुप्ता, सोमा उरांव, सुनील कुमार सिंह, विजय चौधरी, किरण बांडों समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



