Ranchi : नागपुरी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार, नागपुरी भाषा परिषद के अध्यक्ष एवं गोस्सनर महाविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राम प्रसाद का 12 अप्रैल 2025 को उनके आवास पर निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से झारखंडी साहित्यिक समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है।
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13 अप्रैल (रविवार) को नागपुरी भाषा परिषद की ओर से आशा कुंज, कटहल मोड़, पुंदाग स्थित प्रधान कार्यालय में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक साहित्यकार, शोधकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित हुए।
सभा में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नागपुरी विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नंद तिवारी ने कहा डॉ. राम प्रसाद विनम्रता और विद्वता की जीवित प्रतिमूर्ति थे। उनका निधन नागपुरी भाषा ही नहीं, संपूर्ण झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।
परिषद की महासचिव डॉ. शकुंतला मिश्र ने कहा कि वे नागपुरी सहित नौ भाषाओं के समन्वयक थे और मातृभाषा के विकास को ही राज्य के विकास की नींव मानते थे।
परिषद के सचिव डॉ. सुखदेव साहू ने कहा, “डॉ. राम प्रसाद की लेखनी में गजब की शक्ति थी। जो भी उनसे एक बार मिलता, वह उनके विचारों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था।”
इस अवसर पर रामदेव बड़ाईक, डॉ. अंजूलता कुमारी, डॉ. राम कुमार, श्रीकांत गोप, श्याम सुंदर यादव, पांडुरंग हाईबुरु, बबलू कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।
कार्यक्रम का संचालन विक्की मिज ने किया
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में करुणा कुमारी, आशा कुमारी, सुनीता टोप्पो, जगदीश उरांव, पंचू साहू, तबरेज मंसूरी, प्रवीण सिंह, शरत कुमार, फूलदेव उराँव, मुकेश कुमार, रोहित केरकेट्टा, अनुप गाड़ी, राजमोहन महतो, धर्मेंद्र कश्यप सहित अन्य कई श्रद्धालु उपस्थित थे।


