Ranchi : कांके लक्ष्मण चौक से रिंग रोड तक का इलाका इन दिनों गहरे अंधेरे में डूबा हुआ है। जैसे ही शाम होती है, पूरा मार्ग सुनसान और असुरक्षित हो जाता है। वजह — इलाके की अधिकांश स्ट्रीट लाइटें कई हफ्तों से बंद हैं। इससे आमजन में भय का माहौल है और असामाजिक गतिविधियों को खुली छूट मिल गई है।
रात का सफर बना डरावना, महिलाएं और बुजुर्ग डरे
स्थानीय निवासियों और राहगीरों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो नगर निगम ने सुध ली और न ही बिजली विभाग ने कोई पहल की। महिलाओं, बुजुर्गों और विद्यार्थियों के लिए यह मार्ग अब खौफ का रास्ता बन चुका है। अंधेरे का फायदा उठाकर हाल के दिनों में छिनतई और चोरी की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा, ट्रैफिक असुरक्षित
यह मार्ग रिंग रोड से जुड़ने वाला एक प्रमुख रास्ता है, जिससे रोज़ाना भारी संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन गुजरते हैं। बिना रोशनी के, वाहन चालकों को पैदल यात्री या अन्य वाहन समय पर दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय मांगें और प्रशासन की चुप्पी
कांके, पतरातू, बुढ़मू और खिलारी जैसे प्रखंडों के निवासी अब खुलकर सामने आ गए हैं और मांग कर रहे हैं कि स्ट्रीट लाइटों की तत्काल मरम्मत की जाए और निगरानी की स्थायी व्यवस्था लागू हो। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन कार्रवाई नदारद है।
विशेषज्ञों की राय: रोशनी नहीं, तो सुरक्षा नहीं
शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रीट लाइटें केवल रोशनी नहीं देतीं, बल्कि सुरक्षा की पहली परत होती हैं। लंबे समय तक अंधेरे में रहना न सिर्फ अपराध को बढ़ावा देता है, बल्कि शहर की प्रशासनिक विफलता को भी उजागर करता है।
निष्कर्ष: अंधेरे से उजाले की मांग
अब वक्त आ गया है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दे। स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत और नियमित रखरखाव की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें और रांची की साख भी बनी रहे।



