सत्ता चुप, बेटियाँ बेबस! झारखंड की धरती पर आदिवासी अस्मिता पर हमला : सोमा उरांव

मुख्य संवाददाता Ranchi : झारखंड वह भूमि जिसे आदिवासी अस्मिता की आत्मा कहा जाता है, आज उन्हीं की बेटियों की चीखों से कराह रही है। एक बार फिर एक आदिवासी युवती के साथ गैंगरेप की वीभत्स घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। Also

सत्ता चुप, बेटियाँ बेबस! झारखंड की धरती पर आदिवासी अस्मिता पर हमला : सोमा उरांव

मुख्य संवाददाता

Ranchi : झारखंड वह भूमि जिसे आदिवासी अस्मिता की आत्मा कहा जाता है, आज उन्हीं की बेटियों की चीखों से कराह रही है। एक बार फिर एक आदिवासी युवती के साथ गैंगरेप की वीभत्स घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है।

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सरकार आदिवासी हितैषी होने का दावा तो करती है, लेकिन जब बेटियों की अस्मत तार-तार होती है और ज़मीनें छीनी जाती हैं, तो सत्ता के गलियारों में गूंजती है बस खामोशी।

आदिवासी नेता सोमा उरांव ने इस अन्याय के विरुद्ध हुंकार भरी है —

जब हमारी बेटियों को फंसाया जाता है, बलात्कार होता है, और हमारी जमीन हथियाई जाती है, तब ये नेता और समाजसेवी कहां छिप जाते हैं? क्या हमारे सवाल इतने असुविधाजनक हैं?

सोमा उरांव ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व, आदिवासी पहचान का चोला ओढ़ कर न केवल ज़मीनें कब्जा रहे हैं, बल्कि प्रेमजाल और झूठी प्रथाओं की आड़ में युवतियों को फंसा कर शोषण कर रहे हैं।

प्रशासनिक निष्क्रियता, राजनीतिक मौन और बुद्धिजीवियों की सुविधा-जनित चुप्पी — ये वो ताले हैं जो आदिवासियों की चीखों को हर बार दबा देते हैं।

अब हर आदिवासी गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है —

जब सरकार अपनी है, तो इंसाफ पर पहरा क्यों है?

क्या आदिवासी बेटियों की चीखें सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित रहेंगी?

पर अब हालात बदल रहे हैं। समाज जाग रहा है, बेटियाँ अब डर नहीं रहीं, आवाज़ें अब दब नहीं रहीं। यह सिर्फ एक न्याय की मांग नहीं, एक जनजागरण का बिगुल है।

अब फैसला सत्ता को करना है — आदिवासी अस्मिता के साथ खड़ा होगा भारत, या इतिहास दोहराएगा अन्याय का अध्याय?

 

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