दुष्कर्म का दोषी संजय रॉय जेल में भी बना सिरदर्द

Kolkata : आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अगस्त 2024 में हुई सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले का दोषी संजय रॉय जेल में भी लगातार कानून और व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। सजा पाए सिविक वॉलिंटियर संजय रॉय को निचली अदालत ने आजीवन

दुष्कर्म का दोषी संजय रॉय जेल में भी बना सिरदर्द
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Kolkata : आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अगस्त 2024 में हुई सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले का दोषी संजय रॉय जेल में भी लगातार कानून और व्यवस्था को चुनौती दे रहा है। सजा पाए सिविक वॉलिंटियर संजय रॉय को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, और वह बीते सात महीनों से प्रेसिडेंसी सेंट्रल करेक्शनल होम में बंद है।

जेल सूत्रों के अनुसार, संजय रॉय ने अब तक अपने किए पर कोई पछतावा नहीं जताया है। शुरू में उसे जेल परिसर में बागवानी कार्य सौंपा गया था और वह कुछ हद तक नियमों का पालन भी कर रहा था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसका व्यवहार उग्र होता गया। वह सह-कैदियों और जेल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार करने लगा है और जेल अधिकारियों के आदेशों की लगातार अनदेखी कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि अब उसके खिलाफ जेल मैनुअल के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। उसकी जेल में होने वाली दैनिक मजदूरी की रकम को रोकने की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे वह अपनी कमाई को खर्च न कर सके — हालांकि यह राशि उसके खाते में जमा होती रहेगी।

इस पूरे मामले में सुधार सेवाओं के एडीजी एवं आईजी एल. एन. मीणा से संपर्क नहीं हो सका है। वहीं, संजय रॉय के वकील कौशिक गुप्ता का कहना है कि उन्हें जेल के हालातों की कोई जानकारी नहीं है, और वे सिर्फ हाईकोर्ट में चल रही अपील पर ही पक्ष रख रहे हैं।

इस विषय पर मनोवैज्ञानिक और ग्राफोलॉजिस्ट डॉ. रजनीता साहा मुखोपाध्याय का कहना है कि संजय रॉय का यह व्यवहार इस बात को दर्शाता है कि वह अपने अपराध को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। यह मानसिक स्थिति कोर्ट के निर्णय के प्रति आक्रोश, अस्वीकार्यता और आत्म-रक्षा की भावना को दर्शाती है। इसमें असामाजिक प्रवृत्ति के संकेत भी नजर आते हैं।

इस बीच पीड़िता के परिजन नौ अगस्त को उसकी पहली पुण्यतिथि पर ‘नवान्न अभियान’ (राज्य सचिवालय मार्च) निकालेंगे। वे न्याय की मांग को लेकर एक बार फिर सड़कों पर उतरने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि पीड़िता का शव नौ अगस्त 2024 की सुबह अस्पताल के सेमिनार हॉल से बरामद हुआ था।

हालांकि संजय रॉय को ट्रायल कोर्ट से सजा मिल चुकी है, लेकिन सीबीआई अभी तक इस मामले से जुड़ी किसी भी “बड़ी साजिश” का खुलासा नहीं कर सकी है।

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