Kolkata : पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देकर नई बहस छेड़ दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अब तक SIR फॉर्म नहीं भरा है और न ही भरने का इरादा रखती हैं, क्योंकि उन्हें अपनी नागरिकता साबित करने की आवश्यकता नहीं है।
ममता बनर्जी ने कहा, “मैंने अभी तक SIR फॉर्म नहीं भरा है। मैं ऐसा क्यों करूं? मैं तीन बार केंद्रीय मंत्री रही हूं, सात बार सांसद रही हूं और आपके आशीर्वाद से तीन बार मुख्यमंत्री बनी हूं। अब मुझे यह प्रमाणित करना होगा कि मैं नागरिक हूं या नहीं? इससे तो जमीन पर नाक रगड़ना बेहतर है।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई।
इससे पहले कृष्णनगर में एक रैली के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा पर आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया के लिए अधिकारियों को निर्देशित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि जिन लोगों ने दस्तावेज़ों में अपने दादा-दादी के नाम दिए हैं, उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा और उनके नाम हटाए जाने का खतरा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि SIR प्रक्रिया के दौरान किसी भी योग्य मतदाता का नाम हटाया गया, तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी।
उधर, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री सहित सभी संवैधानिक पदाधिकारियों को ‘मार्क्ड इलेक्टर’ श्रेणी में रखा जाता है, और उन्हें सामान्य नागरिकों की तरह फॉर्म भरने की अनिवार्यता नहीं होती। इस श्रेणी में प्रधानमंत्री, सभी मुख्यमंत्री और अन्य संवैधानिक पदाधिकारी शामिल हैं।
बंगाल में SIR का पहला चरण गुरुवार को समाप्त हो रहा है। ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को जारी की जाएगी, जबकि सुनवाई और सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर और जनवरी तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची फरवरी मध्य में प्रकाशित होगी।



