क्या आप जानते हैं भारतीय नोट पर कब से छप रही महात्मा गांधी की तस्वीर?

New Delhi : हमारे रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले भारतीय नोटों पर छपी महात्मा गांधी की तस्वीर आज इतनी सामान्य लगती है कि शायद ही कोई सोचे कि यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई। लेकिन भारतीय मुद्रा का इतिहास बताता है कि

क्या आप जानते हैं भारतीय नोट पर कब से छप रही महात्मा गांधी की तस्वीर?
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New Delhi : हमारे रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाले भारतीय नोटों पर छपी महात्मा गांधी की तस्वीर आज इतनी सामान्य लगती है कि शायद ही कोई सोचे कि यह परंपरा कब और कैसे शुरू हुई। लेकिन भारतीय मुद्रा का इतिहास बताता है कि नोटों पर छपे चेहरे समय के साथ बदलते रहे हैं—और हर बदलाव के पीछे देश की राजनीतिक सोच और पहचान छिपी रही है।

गांधी से पहले किसकी तस्वीर होती थी नोट पर?

भारत में कागजी मुद्रा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। उस दौर में नोट सिर्फ लेन-देन का साधन नहीं, बल्कि सत्ता का प्रतीक भी थे।

  • सबसे पहले भारतीय नोटों पर King George V की तस्वीर छपी।
  • इसके बाद King George VI के चित्र वाले नोट चलन में आए।

ये सभी नोट ब्रिटेन में छपते थे और भारत भेजे जाते थे, जिन पर ब्रिटिश राजशाही की स्पष्ट छाप दिखाई देती थी।

आज़ादी के बाद बदली सोच

1947 में स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार के सामने यह बड़ा सवाल था कि नए भारत की करेंसी पर किसी व्यक्ति की तस्वीर होनी चाहिए या नहीं।
तब यह फैसला लिया गया कि नोटों पर किसी व्यक्ति की तस्वीर नहीं होगी, ताकि देश की पहचान किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रहे।

इसी सोच के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने नोटों पर अशोक स्तंभ के सिंह चिह्न को प्रमुखता दी। साथ ही खेती, उद्योग, विज्ञान और विकास से जुड़े चित्र नोटों की पहचान बने।

पहली बार कब दिखे गांधी जी?

कई वर्षों बाद 1969 में, महात्मा गांधी की जन्म शताब्दी के अवसर पर एक विशेष स्मारक नोट जारी किया गया।

  • इस नोट पर गांधी जी बैठे हुए दिखाई देते हैं
  • पृष्ठभूमि में सेवाग्राम आश्रम दर्शाया गया था

हालांकि यह नोट सीमित उपयोग के लिए था और नियमित चलन की मुद्रा नहीं माना गया।

नियमित नोटों पर गांधी जी कब आए?

  • 1987 में जब ₹500 का नोट दोबारा जारी हुआ, तब उस पर गांधी जी की तस्वीर लगाई गई।
  • लेकिन असली और स्थायी बदलाव 1996 में आया, जब RBI ने महात्मा गांधी सीरीज़ शुरू की।

इसके बाद से भारत में जारी होने वाले सभी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर अनिवार्य कर दी गई।

गांधी जी को ही क्यों चुना गया?

इस फैसले के पीछे तर्क साफ था—

  • महात्मा गांधी भारत की आज़ादी के सबसे बड़े प्रतीक थे
  • वे पूरी दुनिया में अहिंसा, सत्य और शांति के प्रतिनिधि माने जाते हैं
  • उनकी पहचान भारत को वैश्विक स्तर पर एक नैतिक और शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में दर्शाती है

निष्कर्ष

आज भारतीय नोटों पर गांधी जी की तस्वीर सिर्फ एक छवि नहीं, बल्कि भारत की विचारधारा और मूल्यों का प्रतीक है। यह सफर ब्रिटिश राजशाही से शुरू होकर स्वतंत्र भारत की आत्मा तक पहुंचता है—जहां मुद्रा पर छपा चेहरा देश की पहचान बन गया है।

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