Jamshedpur : खेल की दुनिया से निकलकर अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले Vikram Sharma का अंत आखिरकार उसी रास्ते पर हुआ, जिस रास्ते पर वह दूसरों को धकेलता रहा। हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे गंभीर मामलों में नामजद विक्रम शर्मा पर कुल सात आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसने कई राज्यों में अकूत संपत्तियां खड़ी कीं, लेकिन अंत में कानून और अपराध की दुनिया ने उसका वही अंजाम तय किया, जिसके लिए वह खुद कुख्यात था।
जूडो-कराटे कोच से अपराध जगत तक का सफर
वर्ष 1992 में जमशेदपुर के सिदगोड़ा सिनेमा दीवार मैदान में बच्चों को जूडो-कराटे का प्रशिक्षण देने वाला एक सेंसेई आगे चलकर अपराध की दुनिया का चर्चित नाम बन गया। प्रशिक्षण के दौरान उसकी मुलाकात एक ऐसे युवक से हुई, जो बाद में जमशेदपुर का कुख्यात अपराधी बना—Akhilesh Singh।
यहीं से दोनों की दोस्ती की नींव पड़ी, जो खेल मैदान से निकलकर अपराध जगत तक जा पहुंची।
ट्रांसपोर्ट कारोबार से शुरू हुई साझेदारी
1990 के दशक की शुरुआत में जमशेदपुर में ट्रांसपोर्ट कारोबार तेजी से फल-फूल रहा था। इसी दौर में अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा ने मिलकर इस व्यवसाय में कदम रखा। शुरुआत में यह साझेदारी सामान्य व्यापार तक सीमित रही, लेकिन जल्द ही यह वर्चस्व की लड़ाई, ठेकेदारी और रंगदारी में बदल गई।
काबरा अपहरण-हत्याकांड से आया नाम सामने
वर्ष 1998 में हुए काबरा अपहरण और हत्याकांड के बाद विक्रम शर्मा का नाम पहली बार बड़े स्तर पर चर्चा में आया। इस सनसनीखेज मामले ने शहर को झकझोर दिया था। पुलिस जांच में विक्रम का नाम उभरा और इसके बाद उसका आपराधिक ग्राफ लगातार बढ़ता गया।
ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा हत्याकांड
विक्रम शर्मा पर पहला बड़ा आपराधिक मामला 18 दिसंबर 1998 को दर्ज हुआ, जब बिष्टूपुर में चर्चित ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस केस की जांच स्थानीय पुलिस के साथ CID ने भी की। आरोप था कि यह हत्या अखिलेश सिंह गिरोह के इशारे पर और विक्रम की भूमिका में हुई।
नेताओं से नजदीकी दिखाने की कोशिश
विक्रम शर्मा सोशल मीडिया रील्स और तस्वीरों के जरिए बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों से अपने संपर्क को दिखाने की कोशिश करता था। सार्वजनिक कार्यक्रमों की क्लिप्स साझा कर वह यह संदेश देना चाहता था कि उसका राजनीतिक गलियारों में प्रभाव है। सूत्रों के अनुसार, उसके साथ हमेशा छह निजी अंगरक्षक रहते थे।
जेल में बंद अखिलेश की संपत्तियों का रखवाला
जांच एजेंसियों के मुताबिक, दुमका जेल में बंद अखिलेश सिंह की अवैध संपत्तियों और आर्थिक साम्राज्य का संचालन बाहर से विक्रम शर्मा कर रहा था।
29 मार्च 2017 को बिरसानगर स्थित सृष्टि गार्डन, फ्लैट नंबर 503 में छापेमारी के दौरान इसका खुलासा हुआ। बाद में यह संपत्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुक्त की गई।
टाटा स्टील से जुड़ा पारिवारिक बैकग्राउंड
मूल रूप से उत्तराखंड निवासी विक्रम शर्मा के पिता गोविंद शर्मा Tata Steel में कार्यरत थे। परिवार सिदगोड़ा में टाटा स्टील क्वार्टर में रहता था। पिता के रिटायरमेंट के बाद परिवार देहरादून शिफ्ट हो गया। इसी दौरान विक्रम और उसका छोटा भाई अरविंद शर्मा कराटे प्रशिक्षण से जुड़े रहे।
अपराध की दुनिया का वही अंत
जिस रास्ते पर चलकर विक्रम शर्मा ने कई लोगों की जिंदगी तबाह की, आखिरकार उसी रास्ते ने उसे भी निगल लिया। खेल के मैदान से शुरू हुई उसकी कहानी अपराध के अंधेरे में खो गई—और अंत में उसका हश्र वही हुआ, जो वह दूसरों के लिए तय करता आया था।

