New Delhi : देश में सड़कों पर बने गड्ढे आम लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। बीते पांच वर्षों में गड्ढों में गिरने से 9,438 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस मामले में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है, जहां कुल मौतों का आधा से भी ज्यादा हिस्सा दर्ज किया गया है।
यूपी टॉप, मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर
पिछले पांच सालों में उत्तर प्रदेश में गड्ढों के कारण 5,127 लोगों की जान गई है। इसके बाद मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर है, जहां 969 मौतें दर्ज की गईं।
अन्य राज्यों का हाल इस प्रकार रहा:
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तमिलनाडु: 612
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ओडिशा: 425
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पंजाब: 414
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असम: 395
5 साल में 53% की बढ़ोतरी
Ministry of Road Transport and Highways द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, गड्ढों में गिरकर होने वाली मौतों में 53 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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2020: 1,555 मौतें
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2024: 2,385 मौतें
यह आंकड़ा सड़क सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
चौंकाने वाले तथ्य: कई राज्यों में एक भी मौत नहीं
सरकारी रिकॉर्ड में कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी मौत दर्ज नहीं की गई है, जिनमें शामिल हैं:
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बिहार
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गोवा
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चंडीगढ़
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आंध्र प्रदेश
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मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा (उत्तर-पूर्वी राज्य)
दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली में पिछले पांच सालों में गड्ढों में गिरकर मौत के केवल 50 मामले दर्ज हुए, जबकि राजधानी में एक हालिया घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था।
2017 के मुकाबले अब कमी
मंत्रालय के अनुसार, 2017 में गड्ढों में गिरकर मौत के 3,597 मामले सामने आए थे। तुलना करें तो हाल के वर्षों में संख्या घटी है, लेकिन अब भी यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक बना हुआ है।
सवाल बरकरार
सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ रखरखाव और जवाबदेही की कमी लगातार जानलेवा साबित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मरम्मत, स्पष्ट जिम्मेदारी और कड़े मानक लागू किए बिना इस समस्या पर काबू पाना मुश्किल है।

