देवरी (गिरिडीह)। विकास किसी भी क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलने का माध्यम होता है, लेकिन गिरिडीह जिले का अति सुदूरवर्ती देवरी प्रखंड आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। वन, पहाड़ और झाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र के गरीब, आदिवासी, दलित, मजदूर और किसान लंबे समय से रेलवे सुविधा का सपना देख रहे हैं, जो अब भी अधूरा नजर आ रहा है।
हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा नवादा-गिरिडीह रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगी है। यह रेलवे लाइन तिसरी और गांवा होते हुए गिरिडीह तक जाएगी। हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना से देवरी प्रखंड को बाहर रखा जाना स्थानीय लोगों में निराशा और आक्रोश का कारण बन रहा है।
समाजसेवी सुखदेव हाजरा ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक देवरी रेलवे सुविधा से वंचित रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आसपास के क्षेत्रों को रेल संपर्क से जोड़ा जा रहा है, तब देवरी को इस विकास यात्रा से अछूता क्यों रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह वही क्षेत्र है जहां स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व विधायक स्व. बलदेव हाजरा, पूर्व सांसद बाबू तिलकधारी सिंह तथा झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी जैसे नेताओं ने जनता का प्रतिनिधित्व किया। इसके बावजूद देवरी आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर है।
सुखदेव हाजरा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी, जमुआ विधायक डॉ. मंजू कुमारी और केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित रेल परियोजना का विस्तार करते हुए देवरी ब्लॉक, देवरी थाना मोड़ और चतरो होते हुए जमुआ रेल लाइन से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि यदि रेलवे लाइन की लंबाई 130 किलोमीटर से बढ़ाकर 150 किलोमीटर तक की जाए तो देवरी क्षेत्र के लाखों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने तिसरी और गांवा क्षेत्र को रेल परियोजना से जोड़ने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि देवरी की जनता भी इसी प्रकार की सुविधा की हकदार है। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और युवाओं को एकजुट होकर अपनी आवाज सड़क से लेकर सदन तक पहुंचानी होगी।
देवरीवासियों को उम्मीद है कि रेलवे परियोजना के विस्तार के साथ उनके क्षेत्र में भी विकास का नया सूरज उदित होगा और वर्षों पुराना सपना साकार होगा।



