आवारा कुत्ते को लेकर आमने-सामने आए दो देश, एक देना चाहता है नोट पर जगह तो दूसरा मानता है राष्ट्रीय धरोहर

भारत में आवारा कुत्तों को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि दो देश किसी आवारा कुत्ते की नस्ल को लेकर आपस में विवाद करने लगें? ऐसा ही एक दिलचस्प मामला लैटिन अमेरिका में सामने आया है, जहां Brazil

आवारा कुत्ते को लेकर आमने-सामने आए दो देश, एक देना चाहता है नोट पर जगह तो दूसरा मानता है राष्ट्रीय धरोहर
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भारत में आवारा कुत्तों को लेकर अक्सर बहस होती रहती है, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि दो देश किसी आवारा कुत्ते की नस्ल को लेकर आपस में विवाद करने लगें? ऐसा ही एक दिलचस्प मामला लैटिन अमेरिका में सामने आया है, जहां Brazil और Mexico के बीच कारामेलो (Caramelo) कुत्ते को लेकर विवाद बढ़ गया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

विवाद तब शुरू हुआ जब अप्रैल में मेक्सिको ने कारामेलो कुत्ते को अपनी सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रीय प्रतीकों का हिस्सा घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद ब्राजील में लोगों ने नाराजगी जताई और कहा कि यह कुत्ता उनकी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

ब्राजील में लोगों ने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध किया और सरकार से इस विरासत की रक्षा करने की मांग की।

ब्राजील में क्यों खास है कारामेलो कुत्ता?

कारामेलो नस्ल के कुत्ते ब्राजील और मेक्सिको दोनों देशों में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। अपने भूरे रंग और फुर्तीले स्वभाव के कारण ये काफी लोकप्रिय हैं।

ब्राजील में इनकी लोकप्रियता वर्ष 2019 में तब बढ़ी जब इनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इन्हें पालना शुरू किया। इतना ही नहीं, इस कुत्ते की तस्वीर को ब्राजील के 10 रियास के नोट पर छापने की मांग भी उठी।

इसके समर्थन में एक याचिका चलाई गई, जिस पर करीब 50 हजार लोगों ने हस्ताक्षर किए। धीरे-धीरे कारामेलो कुत्ता ब्राजील के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का प्रतीक बन गया। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस पर Netflix पर एक फिल्म भी बनाई गई।

मेक्सिको ने क्या कहा?

ब्राजील की आपत्तियों के जवाब में Claudia Edwards ने कहा कि ब्राजील वह पहला देश था जिसने इस कुत्ते को दुनिया के सामने पहचान दिलाई, लेकिन यह केवल ब्राजील की धरोहर नहीं है।

उनका कहना है कि कारामेलो कुत्ता पूरे लैटिन अमेरिका की साझा विरासत का हिस्सा है।

आज भी सड़कों पर भटक रहे हैं कारामेलो कुत्ते

दिलचस्प बात यह है कि दोनों देश इस कुत्ते पर अपना दावा कर रहे हैं, लेकिन आज भी कारामेलो कुत्ते बड़ी संख्या में ब्राजील और मेक्सिको की सड़कों पर आवारा अवस्था में दिखाई देते हैं।

क्या है कारामेलो कुत्ते की असली कहानी?

कारामेलो कुत्ते का इतिहास लैटिन अमेरिका के औपनिवेशिक दौर से जुड़ा माना जाता है। जब यूरोपीय उपनिवेशवादी यहां आए, तो वे अपने साथ विभिन्न नस्लों के कुत्ते भी लाए। बाद में एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से भी कई नस्लों के कुत्ते यहां पहुंचे।

कई दशकों तक इन नस्लों के बीच प्राकृतिक रूप से प्रजनन होता रहा, जिससे नई मिश्रित नस्लें विकसित हुईं। विशेषज्ञों के अनुसार, कारामेलो कुत्ता लगभग 300 विभिन्न नस्लों के आनुवंशिक मिश्रण का परिणाम है।

आज ब्राजील के लोग इसे अपने संघर्ष, सामाजिक बदलाव और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानते हैं, जबकि मेक्सिको भी इसे अपनी राष्ट्रीय विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताता है। यही वजह है कि एक साधारण आवारा कुत्ता अब दो देशों के बीच सांस्कृतिक बहस का केंद्र बन गया है।

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