मुकेश रंजन
Ranchi : झारखंड की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाले, नागपुरी भाषा-साहित्य के अप्रतिम साधक तथा लोकसंस्कृति के अथक संरक्षक डॉ. बिशेश्वर प्रसाद (बी. पी.) केशरी की 94वीं जयंती पर पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ उन्हें याद किया गया। उनका जन्म 1 जुलाई 1933 को रांची जिले के पिठौरिया गांव में हुआ था। वे केवल एक शिक्षाविद, इतिहासकार और साहित्यकार ही नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन की वैचारिक आधारशिला रखने वाले अग्रणी चिंतक भी थे। उनका संपूर्ण जीवन झारखंड की भाषा, संस्कृति और सामाजिक अस्मिता के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा।
डॉ. केशरी का दृढ़ विश्वास था कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं में बसती है। इसी सोच को जीवन का ध्येय बनाकर उन्होंने नागपुरी भाषा और साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। पिठौरिया में नागपुरी संस्थान (शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र) की स्थापना कर उन्होंने शोध, अध्ययन और सांस्कृतिक संरक्षण की सुदृढ़ परंपरा विकसित की, जो आज भी इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
उनकी साधना का सबसे गौरवपूर्ण अध्याय लगभग 63 वर्षों तक झारखंड के गांव-गांव का भ्रमण कर 35 हजार से अधिक नागपुरी लोकगीत और 5 हजार शिष्ट गीतों का संग्रह करना रहा। इसके साथ ही उन्होंने 248 नागपुरी कवियों की रचनाओं का संकलन एवं प्रकाशन कर नागपुरी साहित्य को अमूल्य धरोहर प्रदान की। यह कार्य आज भी नागपुरी साहित्य के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।
ज्ञान, विनम्रता और सेवा-भाव की सजीव प्रतिमूर्ति डॉ. बी. पी. केशरी का व्यक्तित्व जितना विद्वत्तापूर्ण था, उतना ही सहज और मानवीय भी था। वे विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और समाजसेवियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहे। उनके शोध, लेखन और सांस्कृतिक योगदान ने झारखंड की लोकधरोहर को नई पहचान दिलाई और उसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
उनकी 94वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बी. पी. केशरी का जीवन समाज को अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण का अमूल्य संदेश देता है। उनकी साधना, विचारधारा और सांस्कृतिक योगदान सदैव झारखंड की पहचान बने रहेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा देते रहेंगे। झारखंड सदैव इस महान विभूति का ऋणी रहेगा।



