- बोड़ेया और अरसंडे के पहानों ने रीति-रिवाज से चढ़ाई बलि, अच्छी वर्षा, भरपूर फसल और जनकल्याण की मांगी कामना
मुकेश रंजन
Ranchi : राजधानी रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत बोड़ेया एवं अरसंडे गांव में रविवार को आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक आषाढ़ी पूजा पूरे श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न हुई। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गांव के देवी मड़ई में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित कर गांव, राज्य और समाज की सुख-शांति, समृद्धि तथा उत्तम वर्षा की कामना की गई।
आषाढ़ी पूजा के अवसर पर बोड़ेया गांव के विश्वकर्मा पहान एवं अरसंडे गांव के सुकरा पहान ने वैदिक एवं पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार देवी मड़ई में पूजा-अर्चना संपन्न कर बकरे की बलि अर्पित की। पूजा के दौरान अच्छी वर्षा, भरपूर खेती, सभी परिवारों में सुख-समृद्धि, निरोग जीवन और सामाजिक सौहार्द की मंगलकामना की गई।
ग्रामीणों ने बताया कि आषाढ़ी पूजा उनके पूर्वजों से चली आ रही सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा है, जिसका निर्वहन आज भी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ किया जाता है। लोकमान्यता है कि इस पूजा से देवी प्रसन्न होकर समय पर वर्षा, अच्छी फसल, समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यही कारण है कि इस पर्व को गांव के लोग अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं।
पूजा समारोह में परना उरांव, आसमानी उरांव, दिलीप पहान, भुटका पहान, रंजीत मुंडा, डेलंगा उरांव, महादेव उरांव, सुकरा उरांव, जुगनू उरांव, दालू पहान, मंगरा उरांव, मनुवा नायक, सुरेश उरांव तथा पंचायत समिति सदस्य अमर तिर्की सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन एवं व्यवस्थापन मुखिया सोमा उरांव की देखरेख में संपन्न हुआ। इस अवसर पर ग्रामीणों ने अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प भी दोहराया। आषाढ़ी पूजा के माध्यम से क्षेत्र में एक बार फिर आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत और प्रकृति के प्रति अटूट आस्था की झलक देखने को मिली।



