- मीडिया रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2018-19 से 2025-26 के बीच स्कूलों की संख्या 15.5 लाख से घटकर 14.6 लाख रह गई, जबकि 3 से 17 वर्ष के करीब 11.1 करोड़ बच्चे स्कूल शिक्षा से बाहर बताए गए हैं।
New Delhi : भारत में स्कूलों की संख्या पिछले आठ वर्षों में घटी है, जबकि छात्रों के नामांकन में भी कमी दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 में देश में कुल 15.5 लाख स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 14.6 लाख रह गए।
इसी अवधि में छात्रों का नामांकन भी 26 करोड़ से घटकर 24.7 करोड़ हो गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025-26 में 3 से 17 वर्ष की आयु के करीब 11.1 करोड़ बच्चे स्कूल शिक्षा से बाहर थे।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में उठे सरकारी स्कूलों के मुद्दे
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल ही में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। अभियान के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में खराब बुनियादी ढांचे, शिक्षकों और सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे उठाए गए।
अभियान में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या, छात्रों के नामांकन में गिरावट और निजी स्कूलों पर बढ़ती निर्भरता को भी उजागर किया गया है।
छात्रों के नामांकन में भी आई कमी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में 2018-19 में छात्रों का कुल नामांकन करीब 26 करोड़ था। वर्ष 2025-26 में यह संख्या घटकर 24.7 करोड़ रह गई।
स्कूलों की संख्या और छात्रों के नामांकन में गिरावट के बावजूद छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। 2018-19 में औसतन 27 छात्रों पर एक शिक्षक था, जबकि 2025-26 में यह अनुपात सुधरकर 24 छात्रों पर एक शिक्षक हो गया।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात में यह सुधार मुख्य रूप से छात्रों की संख्या कम होने की वजह से हुआ है, न कि शिक्षकों की संख्या बढ़ने के कारण।
11.1 करोड़ बच्चे स्कूल शिक्षा से बाहर
वर्ष 2025-26 में करीब 31 फीसदी पात्र बच्चों का स्कूलों में नामांकन नहीं था। यानी 3 से 17 वर्ष की आयु के करीब 11.1 करोड़ बच्चे स्कूल शिक्षा से बाहर बताए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्थिति पिछले आठ वर्षों से बनी हुई है।
बुनियादी सुविधाएं बेहतर, डिजिटल संसाधनों की कमी
अधिकांश सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। करीब 99 फीसदी सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा है, जबकि 94 फीसदी में बिजली और 96 फीसदी स्कूलों में शौचालय उपलब्ध हैं।
हालांकि, डिजिटल सुविधाओं के मामले में स्थिति अभी कमजोर बताई गई है। केवल 25 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर, 16 फीसदी में प्रोजेक्टर और छह फीसदी स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी उपलब्ध हैं।
शिक्षा बजट की हिस्सेदारी में भी गिरावट
सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी के साथ शिक्षा बजट की हिस्सेदारी में भी गिरावट दर्ज की गई है। कुल केंद्रीय बजट में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2010 में 1.9 फीसदी थी।
यह हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 में घटकर 1.4 फीसदी रह गई है।



