New Delhi : ‘खेलो इंडिया डायलॉग–खेल की बात, प्रधानमंत्री मोदी के साथ’ कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देशभर के युवा एथलीटों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत का खेल विजन केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए खेल शक्ति और युवा शक्ति को जोड़ने का अभियान है।
प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं के सामर्थ्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि खेल के मैदान से लेकर समाज के हर क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी ही भारत की शक्ति है। उन्होंने खिलाड़ियों से नए विचार देने और खेलों को नई दिशा देने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय खेल दिवस और मेजर ध्यानचंद को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। उन्होंने खेल जगत से जुड़े सभी लोगों और युवाओं को खेल दिवस की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि यह दिन भारत की महान खेल प्रतिभा मेजर ध्यानचंद को याद करने का अवसर भी है। करीब 100 साल पहले भारतीय सेना की हॉकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे का उल्लेख करते हुए पीएम ने कहा कि उसी यात्रा ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों की नींव रखी थी।
खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 15 अगस्त को लालकिले से देश के सामने भारत का स्पोर्ट्स विजन रखा था। उनके अनुसार, खेल का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, परिवार और देश के गौरव को आगे बढ़ाना भी है।
उन्होंने कहा, “जो खेले वो खिले।” पीएम के अनुसार, खेल में खिलने का मतलब केवल मैदान पर जीत हासिल करना नहीं है, बल्कि व्यक्ति का सर्वांगीण विकास और देश की प्रतिष्ठा बढ़ना भी है।
उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी सफलता हासिल करता है तो उसके परिवार, स्कूल, कॉलेज, जिले और राज्य की पहचान बढ़ती है। एक खिलाड़ी की उपलब्धि पूरे क्षेत्र को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है।
हर जिले में खेल प्रतिभा तलाशने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में देश के सैकड़ों जिलों के खिलाड़ी जुड़े हैं और हर जिले में वैश्विक स्तर पर चमकने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत को उन खेलों पर भी ध्यान देना होगा, जिनमें अब तक देश की भागीदारी सीमित रही है।
उन्होंने कहा कि 2012 ओलंपिक में भारत ने केवल 13 खेलों में हिस्सा लिया था, जबकि 20 से अधिक खेलों में भारत की भागीदारी नहीं थी। ऐसे में पदकों की संख्या बढ़ाने के लिए नए खेलों में प्रतिभा तलाशने और महारत हासिल करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने सर्फिंग, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, वॉटर स्पोर्ट्स और विंटर स्पोर्ट्स का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास इन खेलों के लिए आवश्यक भूगोल और जनसंख्या है, लेकिन देश अभी इन क्षेत्रों में पर्याप्त रूप से आगे नहीं बढ़ पाया है।
2036 ओलंपिक के लिए आज से करनी होगी तैयारी
पीएम मोदी ने कहा कि अलग-अलग जिलों में विशेष खेलों की संभावनाओं की पहचान करनी होगी। ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
2036 ओलंपिक की तैयारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश को आज से ही उन खिलाड़ियों को तैयार करना होगा, जो 2036 में विभिन्न खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया डायलॉग केवल खेलों पर चर्चा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ऐसा मंच है, जहां युवाओं के विचार भारत के स्पोर्ट्स विजन को नई दिशा दे सकते हैं। खेल प्रतिभा विकास, स्पोर्ट्स इकोसिस्टम, गवर्नेंस और विकसित भारत को लेकर युवाओं के सुझावों को सुना जाएगा और नीतियों में शामिल किया जाएगा।
पैरालंपिक खिलाड़ियों का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के कई खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आर्चरी में शीतल ने पैरालंपिक में पदक जीतकर देश और जम्मू-कश्मीर को गौरवान्वित किया।
उन्होंने अवणी लेखड़ा, सुमीत अंतिल, नितेश कुमार और झंडू कुमार जैसे खिलाड़ियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां देश के युवाओं को प्रेरित करती हैं।
खेल को बेहतर जीवन और नशामुक्ति से जोड़ा
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल बेहतर जीवन की गारंटी है। खेल लोगों को फिट रखने के साथ जीवनशैली को बेहतर बनाता है।
उन्होंने कहा कि खेल युवाओं में नशे से दूर रहने की इच्छाशक्ति भी विकसित करता है। देश में नशे की चुनौती का मुकाबला करने के लिए खेलों को बढ़ावा देना जरूरी है।
पीएम मोदी ने धावक फौजा सिंह का भी उल्लेख किया और कहा कि वे जीवनभर खेल और फिटनेस के प्रति समर्पण की मिसाल रहे।
स्क्रीन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की जरूरत
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में खेल अब एक पेशे के रूप में उभर रहा है और समाज का नजरिया भी बदल रहा है। लोग दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं, परिवार के साथ योग कर रहे हैं और पिकल बॉल तथा बैडमिंटन जैसे खेलों से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “स्क्रीन से ज्यादा खेल केंद्रों की अहमियत है और प्ले स्टेशन से ज्यादा प्ले ग्राउंड की अहमियत है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए खेल विज्ञान, खेल मनोविज्ञान और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर बढ़ रहे हैं। खेल उपकरण, प्रशिक्षण के तरीके, आयोजन और प्रतिस्पर्धाओं की जरूरतें भी बदल रही हैं।
उन्होंने युवाओं से इन अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें देश की युवा शक्ति और सामर्थ्य पर पूरा भरोसा है। पीएम मोदी ने कहा कि खेल के मैदान में हो या समाज के किसी अन्य क्षेत्र में, युवाओं की भागीदारी ही भारत की शक्ति है।



