- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के किर्गिस्तान दौरे के बाद चीन की एक महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना चर्चा में है। चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के रास्ते यूरोप तक नया रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के किर्गिस्तान दौरे के बाद चीन की एक महत्वाकांक्षी रेलवे परियोजना चर्चा में है। चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के रास्ते यूरोप तक नया रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद चीन और यूरोप के बीच व्यापार के लिए एक नया और महत्वपूर्ण रास्ता खुल सकता है।
इस रेलवे कॉरिडोर को चीन की रणनीतिक और कारोबारी महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रस्तावित रेल मार्ग चीन को मध्य एशिया के देशों से जोड़ते हुए यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने में मदद कर सकता है।
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रूस को बायपास करने की रणनीति
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए चीन रूस के पारंपरिक रेल मार्ग को बायपास करते हुए यूरोप तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। चीन के लिए यूरोप एक बड़ा कारोबारी बाजार है और तेज तथा वैकल्पिक परिवहन मार्ग उसके व्यापार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
किर्गिस्तान से उज्बेकिस्तान होते हुए आगे यूरोप तक जाने वाला यह कॉरिडोर चीन के मौजूदा व्यापारिक नेटवर्क को और मजबूत कर सकता है। इससे माल ढुलाई के लिए नए विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है।
करीब 500 किलोमीटर की नई रेल लाइन
रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना के तहत करीब 500 किलोमीटर लंबे नए रेल मार्ग पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य चीन को किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान के रास्ते आगे के अंतरराष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ना है।
नई रेल लाइन तैयार होने के बाद चीन से यूरोप तक सामान पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो सकता है। इससे यात्रा की दूरी और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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चीन के कारोबार को मिल सकता है बड़ा फायदा
चीन लंबे समय से बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों के बीच सड़क, रेल और बंदरगाहों का नेटवर्क विकसित करने पर जोर दे रहा है। नई रेलवे परियोजना भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
रेल मार्ग के जरिए चीन अपने सामान को मध्य एशिया के बाजारों तक पहुंचाने के साथ-साथ यूरोप तक निर्यात के लिए भी नया विकल्प तैयार कर सकता है। इससे चीन के लिए लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने का रास्ता खुल सकता है।
भारत के लिए भी बन सकते हैं नए अवसर
चीन की इस परियोजना का असर सिर्फ चीन और यूरोप तक सीमित नहीं रह सकता। मध्य एशिया में बढ़ते रेल और व्यापारिक संपर्क से भारत के लिए भी भविष्य में नए कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावना है।
भारत मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। ऐसे में क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने से भारतीय कारोबारियों के लिए भी नए बाजारों तक पहुंच के विकल्प बन सकते हैं।
हालांकि, इस परियोजना के वास्तविक प्रभाव का पता इसके निर्माण और संचालन की प्रगति के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल चीन के लिए यह परियोजना मध्य एशिया के जरिए यूरोप तक अपनी पहुंच मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

