नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सात प्रमुख मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की घोषणा की है। पार्टी ने महिला, युवा, OBC, SC, ST, किसान और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। माना जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों के जरिए पार्टी इन सामाजिक और संगठनात्मक वर्गों के बीच अपनी सक्रियता और पहुंच को और बढ़ाने पर जोर देगी। भाजपा की नई नियुक्तियों में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों से जुड़े नेताओं को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। पार्टी संगठन के लिहाज से इन सातों मोर्चों को काफी अहम माना जाता है, क्योंकि इनके माध्यम से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के बीच संपर्क मजबूत किया जाता है।
किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी?
भाजपा की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक सात मोर्चों की जिम्मेदारी इस प्रकार तय की गई है:
- महिला मोर्चा: डी. पुरंदेश्वरी
- युवा मोर्चा: हरीश द्विवेदी
- OBC मोर्चा: वैजयंत पांडा
- SC मोर्चा: संजय भाटिया
- ST मोर्चा: सतीश पूनिया
- किसान मोर्चा: लाल सिंह आर्या
- अल्पसंख्यक मोर्चा: गजेंद्र पटेल
इन नियुक्तियों के साथ भाजपा ने संगठन के अलग-अलग मोर्चों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया है।
सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर
भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में मोर्चों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। महिला और युवा मोर्चे जहां नए कार्यकर्ताओं और युवा वर्ग के साथ संपर्क बढ़ाने का काम करते हैं, वहीं किसान, OBC, SC और ST मोर्चों के जरिए संबंधित सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की गतिविधियों को मजबूत किया जाता है। अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी भी संगठन के लिहाज से अहम मानी जाती है। नई टीम के जरिए पार्टी अलग-अलग समुदायों और सामाजिक वर्गों के साथ संवाद को और प्रभावी बनाने की कोशिश कर सकती है।
संगठन को मजबूत करने की कवायद
भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव को पार्टी की आगे की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। सातों मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति से नेताओं की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी और संबंधित मोर्चों की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। नई टीम के सामने जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और विभिन्न वर्गों तक पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों को पहुंचाने की चुनौती होगी।


