पश्चिमी सिंहभूम में ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान शुरू, बच्चों में पढ़ने और लिखने की आदत पर जोर

पश्चिमी सिंहभूम में ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान शुरू हुआ। बाल वाटिका से कक्षा 5 तक के बच्चों में पढ़ने, लिखने और अभिव्यक्ति क्षमता पर जोर दिया जाएगा।
DC मनीष कुमार ने जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
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पश्चिमी सिंहभूम: जिले में शुरुआती कक्षाओं के बच्चों के बीच पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने और उनकी भाषा व अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। गुरुवार को जिला समाहरणालय परिसर से उपायुक्त (DC) मनीष कुमार ने जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। जागरूकता वाहन जिले के अलग-अलग क्षेत्रों और प्राथमिक विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को अभियान के उद्देश्य के बारे में जानकारी देगा।

बाल वाटिका से कक्षा पांच तक के बच्चों पर विशेष फोकस

‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान का मुख्य फोकस बाल वाटिका से कक्षा पांच तक के विद्यार्थियों पर रखा गया है। इस उम्र में बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने को उनकी आगे की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अभियान के दौरान बच्चों को कहानियों और सरल पठन सामग्री के माध्यम से पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही उन्हें पढ़ी हुई बातों को समझने और अपने विचारों को अपने शब्दों में व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

पढ़ने के साथ कहानी लिखने के लिए भी प्रेरित होंगे बच्चे

उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि केवल किताब पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों में पढ़ी गई सामग्री को समझने और उस पर अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता भी विकसित होनी चाहिए। नियमित पठन से बच्चों की भाषा समझ बेहतर होती है और उनके शब्द भंडार में भी वृद्धि होती है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को नियमित रूप से पढ़ने, सुनने और बोलने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। इसके साथ ही विद्यार्थियों को अपनी छोटी-छोटी कहानियां लिखने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।

अभियान से बच्चों को होंगे ये फायदे

  • पढ़ने की नियमित आदत विकसित होगी।
  • बच्चों की भाषा समझ बेहतर होगी।
  • शब्द भंडार में वृद्धि होगी।
  • अपने विचार व्यक्त करने का आत्मविश्वास बढ़ेगा।
  • कहानी पढ़ने और लिखने में रुचि विकसित होगी।
  • सुनने और बोलने की क्षमता को मजबूती मिलेगी।

अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी भी जरूरी

DC मनीष कुमार ने कहा कि अभियान को प्रभावी बनाने में केवल विद्यालयों की भूमिका पर्याप्त नहीं है। बच्चों के घर और आसपास का माहौल भी उनकी पढ़ने की आदत को प्रभावित करता है। ऐसे में अभिभावकों और समुदाय को भी बच्चों को नियमित रूप से पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से बच्चों के लिए ऐसा माहौल तैयार किया जा सकता है, जहां किताब पढ़ना पढ़ाई का बोझ नहीं बल्कि सीखने और अपनी कल्पना को व्यक्त करने का माध्यम बने।

स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा जागरूकता वाहन

अभियान के तहत रवाना किया गया जागरूकता वाहन जिले के विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों और क्षेत्रों में पहुंचेगा। यहां बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को पठन गतिविधियों के महत्व की जानकारी दी जाएगी।

जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि शुरुआती कक्षाओं से ही बच्चों में पढ़ने और लिखने की मजबूत आदत विकसित हो। इससे आगे की कक्षाओं में उनकी भाषा, समझ और अभिव्यक्ति क्षमता को बेहतर आधार मिल सकेगा।

शुरुआती शिक्षा को मजबूत करने की पहल

‘मेरे शब्द, मेरी कहानी’ अभियान को बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। प्रारंभिक स्तर पर पढ़ने और समझने की क्षमता मजबूत होने से बच्चों को आगे की पढ़ाई में भी मदद मिल सकती है। जिला प्रशासन की ओर से अभियान को विद्यालय स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने और अधिक से अधिक बच्चों को इससे जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

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