Koderma: सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्ववर्ती छात्र और भारतीय सेना के पर्वतारोही लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार ने एक बार फिर झारखंड का मान बढ़ाया है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना के 30 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में 6512 मीटर ऊंची माउंट भागीरथी चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराया। 22 सितंबर को दल के 28 सदस्य करीब दस घंटे की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई के बाद शिखर तक पहुंचे। यह अभियान केवल एक पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं था, बल्कि भारतीय सेना के प्रस्तावित एवरेस्ट मैसिफ अभियान 2027 की तैयारियों का भी अहम हिस्सा रहा। कठिन मौसम और हिमस्खलन के खतरे के बीच अभियान की दिशा बदलने का निर्णय लेते हुए टीम ने भागीरथी चोटी को लक्ष्य बनाया और सफलता हासिल की।
पहले माउंट सतोपंथ था अभियान का लक्ष्य
भारतीय सेना का 30 सदस्यीय पर्वतारोहण दल 1 अगस्त को नई दिल्ली में गठित किया गया था। टीम 20 अगस्त को उत्तराखंड के लिए रवाना हुई। शुरुआत में दल का लक्ष्य 7075 मीटर ऊंची माउंट सतोपंथ चोटी पर चढ़ाई करना था। 24 अगस्त को गंगोत्री में बेस कैंप स्थापित किया गया। इसके बाद गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पांच कैंप तैयार किए गए। दल के सामने रास्ता आसान नहीं था। पर्वतारोहियों को गंगोत्री, चतुरंगी और सुंदर बामक हिमखंडों को पार करते हुए बेहद दुर्गम क्षेत्र से गुजरना पड़ा। इस दौरान भारी बारिश, बर्फबारी, नदी-नालों और हिमस्खलन के खतरे ने मुश्किलें बढ़ाईं। वासुकीताल में करीब 16 हजार फीट की ऊंचाई पर मुख्य कैंप बनाया गया। अभियान के दौरान पर्वत पर लगभग 2000 मीटर रस्सी भी स्थापित की गई, जिससे आगे की चढ़ाई को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में मदद मिली।
Also Read: क्या सोशल मीडिया से लोग गे या लेस्बियन बन रहे हैं? जानिए क्या कहती है वैज्ञानिक समझ – PRATAH NEWZ
मौसम ने बदला अभियान का रास्ता
लगातार हो रही भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चेतावनी के बीच ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार ने सतोपंथ अभियान को रोकने का फैसला लिया। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए टीम ने माउंट भागीरथी की दिशा में आगे बढ़ने की रणनीति बनाई। 21 सितंबर को अंतिम कैंप स्थापित किया गया। इसके अगले दिन 22 सितंबर की रात करीब दो बजे पर्वतारोहियों ने शिखर की अंतिम चढ़ाई शुरू की। करीब 1200 मीटर की खड़ी और संकरी चढ़ाई टीम के लिए सबसे कठिन चरणों में से एक रही। तेज हवाओं, बेहद कम तापमान, बर्फीली दरारों, पत्थर गिरने और लगातार बर्फबारी के बीच पर्वतारोहियों ने अपना अभियान जारी रखा। लगभग 10 घंटे की लगातार चढ़ाई के बाद दोपहर करीब 12 बजे दल के 28 सदस्य माउंट भागीरथी के शिखर पर पहुंचे। वहां तिरंगा फहराकर टीम ने अभियान की सफलता दर्ज की।
55 से ज्यादा चोटियों पर अभियान कर चुके हैं जय प्रकाश
मूल रूप से बोकारो जिले के रहने वाले ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार वर्ष 2005 से भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2009 में पर्वतारोहण की शुरुआत की थी और तब से अब तक 55 से अधिक चोटियों पर अभियान कर चुके हैं।
उनके प्रमुख पर्वतारोहण अभियानों में शामिल हैं:
- वर्ष 2019 में माउंट एवरेस्ट अभियान
- वर्ष 2024 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो
- थालेसागर
- कून और नून
- देव टिब्बा
- जोगिन
- शिपकी
- कनामो
- कुल्लू पूमोरी
- कांगयात्से
पर्वतारोहण और खोज अभियानों में योगदान के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें वर्ष 2021 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया। इसके अलावा राष्ट्रपति द्वारा उन्हें तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2020 भी प्रदान किया गया।
एवरेस्ट मैसिफ 2027 के लिए अहम तैयारी
ले. कर्नल जय प्रकाश कुमार को भारतीय सेना के प्रस्तावित एवरेस्ट मैसिफ अभियान 2027 का नेतृत्व सौंपा गया है। इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत सेना के प्रशिक्षित पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट के साथ ल्होत्से और नुप्तसे चोटियों पर अभियान की तैयारी कर रहे हैं। माउंट भागीरथी अभियान को इसी तैयारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में टीम की क्षमता, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने और तकनीकी पर्वतारोहण कौशल को परखने के लिहाज से ऐसे अभियान महत्वपूर्ण होते हैं। सैनिक स्कूल तिलैया के पूर्ववर्ती छात्र की इस उपलब्धि से कोडरमा और झारखंड में भी गर्व का माहौल है। ले. कर्नल जय प्रकाश की यह सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और भारतीय सेना के साहसिक अभियानों की एक और उपलब्धि के रूप में सामने आई है।




