रिश्तों की आत्मीयता से दूर होती नई पीढ़ी, संस्कारों का क्षरण चिंताजनक : गोविंद शेंडे

अंग्रेजियत के प्रभाव से पारिवारिक मूल्यों में बदलाव पर जताई चिंता, नैतिक शिक्षा को विद्यालयों तक पहुंचाने पर जोर मुकेश रंजन Ranchi : परिवार, संस्कार और नैतिक मूल्यों को मजबूत किए बिना सुदृढ़ समाज का निर्माण संभव नहीं है। आज अंग्रेजियत के बढ़ते प्रभाव के

रिश्तों की आत्मीयता से दूर होती नई पीढ़ी, संस्कारों का क्षरण चिंताजनक : गोविंद शेंडे
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  • अंग्रेजियत के प्रभाव से पारिवारिक मूल्यों में बदलाव पर जताई चिंता, नैतिक शिक्षा को विद्यालयों तक पहुंचाने पर जोर

मुकेश रंजन
Ranchi : परिवार, संस्कार और नैतिक मूल्यों को मजबूत किए बिना सुदृढ़ समाज का निर्माण संभव नहीं है। आज अंग्रेजियत के बढ़ते प्रभाव के कारण नई पीढ़ी पारंपरिक रिश्तों की आत्मीयता और भारतीय संस्कारों से दूर होती जा रही है। परिवारों में बुआ, मौसी, काकी, नानी और दादी जैसे रिश्तों के भावनात्मक महत्व को समझाने की आवश्यकता है। ये बातें विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय नैतिक शिक्षा प्रमुख गोविंद शेंडे ने सोमवार को शक्ति आश्रम, किशोरगंज चौक, हरमू रोड स्थित विहिप प्रांत कार्यालय में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कहीं।

गोविंद शेंडे ने कहा कि घरों में रामायण की कथा सुनने-सुनाने की परंपरा तो है, लेकिन उसके आदर्शों को जीवन में उतारना भी उतना ही जरूरी है। आचरण से संस्कार और संस्कार से चरित्र का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान की ऐसी परंपरा विकसित की, जिसमें उम्र और संबंध के अनुसार माता, बहन, बेटी, दादी और नानी के समान सम्मान देने की भावना रही है। इस दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि संस्कारों के कमजोर होने से समाज में महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध जैसी गंभीर सामाजिक चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल कानून और दंड के भरोसे सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है। बच्चों में बचपन से ही नैतिक मूल्यों, कर्तव्यबोध और चरित्र निर्माण की भावना विकसित करनी होगी।

विद्यालयों में नैतिक शिक्षा का प्रकल्प

गोविंद शेंडे ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद की ओर से देशभर में नई पीढ़ी को नैतिक शिक्षा देने के उद्देश्य से प्रकल्प चलाया जा रहा है। इसके तहत सरकारी और निजी विद्यालयों से संपर्क कर पहले शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इसके बाद शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा और कर्तव्यबोध से संबंधित विषयों की जानकारी दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों की सीख को परखने के लिए परीक्षा भी आयोजित की जाएगी। इसमें प्रश्नोत्तरी के साथ विद्यार्थियों से विषय पर संक्षेप में अपना मंतव्य लिखने के लिए भी कहा जाएगा। उनके अनुसार, यही उनकी वास्तविक परीक्षा होगी, क्योंकि नैतिक शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे व्यवहार और जीवन में उतारना है।

बैठक में पटना व गुवाहाटी क्षेत्र धर्माचार्य संपर्क प्रमुख वीरेंद्र विमल, पटना क्षेत्र मंत्री डॉ. वीरेंद्र साहू, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, बजरंग दल प्रांत संयोजक रंगनाथ महतो, मातृशक्ति प्रांत संयोजिका अनीमा पांडेय, दुर्गावाहिनी प्रांत संयोजिका कीर्ति गौरव, प्रांत धर्म प्रसार परियोजना प्रमुख रेणु अग्रवाल, प्रांत सह विद्यार्थी प्रमुख अमर प्रसाद, महानगर सहमंत्री राजेश अग्रवाल तथा रामगढ़ जिला सहमंत्री अमित साहू सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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