Bihar: मुजफ्फरपुर जिले के पूर्वी हिस्से में बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। कटौझा और बेनीबाद में नदी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। इसका सीधा असर औराई, कटरा और गायघाट प्रखंड के निचले इलाकों पर पड़ा है। कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है, जबकि बड़ी संख्या में परिवार ऊंचे स्थानों और घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, कटौझा में बागमती नदी खतरे के निशान से 1.30 मीटर और बेनीबाद में 1.24 मीटर ऊपर बह रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही नए इलाकों में पानी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
कटरा के कई गांव पानी में डूबे
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर कटरा और गायघाट प्रखंड के निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। कटरा के आधा दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी फैल चुका है। कई जगहों पर घरों के अंदर पानी घुस गया है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, कटरा क्षेत्र में करीब 8 हजार लोग बाढ़ से सीधे प्रभावित हुए हैं। पानी बढ़ने के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कई गांवों में सड़क और रास्ते जलमग्न होने के कारण आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, कुछ इलाकों में लोग कमर तक पानी से होकर आने-जाने को मजबूर हैं।
घरों में दो फीट तक पानी, छतों पर शरण
बाढ़ की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई घरों के भीतर करीब दो फीट तक पानी जमा हो गया है। सामान और जरूरी चीजों को बचाने के लिए लोग उन्हें ऊंचे स्थानों पर रख रहे हैं। कई परिवार घर की छतों या अपेक्षाकृत ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। खाने की व्यवस्था करना भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पानी से घिरे घरों में कुछ लोग चौकी या तख्त के ऊपर चूल्हा रखकर खाना बनाने को मजबूर हैं। इससे साफ है कि बाढ़ ने सिर्फ आवागमन ही नहीं, बल्कि लोगों की सामान्य दिनचर्या को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
गायघाट के निचले इलाकों में भी बढ़ा खतरा
कटरा से सटे गायघाट प्रखंड के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। इससे आसपास के दूसरे गांवों पर भी बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हुई तो प्रभावित क्षेत्र का दायरा और बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की है। पानी बढ़ने के कारण कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
प्रशासन ने राहत-बचाव की तैयारी का किया दावा
बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव कार्य के लिए जरूरी तैयारियां की गई हैं। प्रभावित लोगों के लिए कम्युनिटी किचन संचालित करने की व्यवस्था भी बताई गई है। हालांकि, प्रभावित इलाकों के लोगों की शिकायतें प्रशासन के दावों से अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें अभी पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिल रही है।
नाव और राहत सामग्री की कमी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि कई प्रभावित इलाकों में पर्याप्त संख्या में नाव उपलब्ध नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा भोजन, तिरपाल और अन्य जरूरी राहत सामग्री को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते पानी के बीच प्रभावित परिवारों तक समय पर राहत पहुंचाने की है। बागमती का जलस्तर अगर इसी तरह बढ़ता रहा, तो मुजफ्फरपुर के पूर्वी हिस्से में बाढ़ का संकट और व्यापक हो सकता है।




