झारखंड बंद से पहले रांची में मशाल जुलूस, आंदोलनकारियों ने उठाईं लंबित मांगें

झारखंड बंद से पहले रांची में मशाल जुलूस निकाला गया। आंदोलनकारियों ने पेंशन, रोजगार, विस्थापितों के अधिकार और 26% रॉयल्टी समेत कई मांगें उठाईं।
झारखंड बंद से पहले रांची में मशाल जुलूस
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Ranchi: 30 सितंबर को प्रस्तावित झारखंड बंद से एक दिन पहले मंगलवार को राजधानी रांची में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की ओर से मशाल जुलूस निकाला गया। शहीद चौक से शुरू हुआ जुलूस अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। मोर्चा के अनुसार, बंद और मशाल जुलूस के जरिए झारखंड आंदोलनकारियों, किसानों और विस्थापितों से जुड़ी विभिन्न मांगों को सरकार के सामने रखा जा रहा है।

कार्यक्रम का नेतृत्व झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा और किसान सभा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने किया। उन्होंने कहा कि राज्य के 24 जिलों और करीब 200 प्रखंडों में मशाल जुलूस के माध्यम से 30 सितंबर के बंद का आह्वान किया गया है।

वर्षों से लंबित मांगों को लेकर आंदोलन

पुष्कर महतो ने कहा कि अलग झारखंड राज्य बने 26 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आंदोलनकारी संगठनों की कई मांगें अभी लंबित हैं। मोर्चा का कहना है कि इन्हीं मुद्दों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा रहा है।

आंदोलनकारियों की ओर से प्रमुख रूप से निम्न मांगें उठाई गई हैं:

  • झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मान पेंशन और अन्य सुविधाएं देना
  • आंदोलनकारियों के आश्रितों के लिए रोजगार और नौकरी की सुविधा
  • किसानों की ऋण माफी
  • विस्थापितों को मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास
  • जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा
  • किसानों के विस्थापन और पलायन को रोकने की मांग
  • झारखंड की खनिज संपदा पर 26 प्रतिशत रॉयल्टी की मांग
  • आंदोलनकारियों के मौलिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा

शिबू सोरेन को सर्वोच्च सम्मान देने की मांग

मोर्चा की ओर से झारखंड आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन के योगदान का उल्लेख करते हुए उनके नाम को गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से झारखंड आंदोलनकारियों के सर्वोच्च सम्मान से जोड़ने की मांग भी उठाई गई है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द विचार करे, ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत न पड़े।

15 नवंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी

मोर्चा ने कहा है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो 15 नवंबर 2026 से आगे आंदोलन करने का कार्यक्रम बनाया जा सकता है। संगठन की ओर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन और प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है। इसी तरह की चेतावनी को लेकर पूर्व में भी आंदोलनकारी संगठनों की ओर से बयान सामने आए हैं।

30 सितंबर के बंद को लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भी तैयारियां की गई हैं। विभिन्न जिलों में 29 सितंबर को मशाल जुलूस और 30 सितंबर को बंद के कार्यक्रम की जानकारी सामने आई है।

मशाल जुलूस में कई संगठन और आंदोलनकारी शामिल

रांची में निकाले गए मशाल जुलूस में पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, मो. आसिफ, अनथन लकड़ा, शीला कच्छप, बेली बलवंती एक्का, रेखा देवी, केडी सिंह, करमा तिग्गा, अजय कुमार, अमर भेंगरा, मनोज लकड़ा, सिमोन तिग्गा, श्यामल बनर्जी, करमा उरांव, समीर लकड़ा, सुरेंद्र कुमार महतो, दिनेश महतो, किरण कुमारी, शैलेंद्र शर्मा, संजय सिंह और कुलदीप ठाकुर समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

इसके अलावा अखिल भारतीय किसान सभा, झारखंड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा और झारखंड आंदोलनकारी युवा मोर्चा से जुड़े सदस्यों की भी मौजूदगी रही।

बंद को लेकर क्या है स्थिति?

झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा ने 30 सितंबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय संगठनों की ओर से बंद और उससे जुड़े कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं।

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