वियतनाम हादसे में जान गंवाने वाले योग शिक्षक का पार्थिव शरीर जल्द आएगा भारत, संजय सेठ ने जयशंकर से की मुलाकात

वियतनाम सड़क हादसे में जान गंवाने वाले योग शिक्षक राजा कुमार वर्मा का पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए संजय सेठ ने जयशंकर से मुलाकात की।
पार्थिव शरीर भारत लाने को जयशंकर से मिले संजय सेठ
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नई दिल्ली: वियतनाम में सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले योग शिक्षक राजा कुमार वर्मा का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने गुरुवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात कर इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया। संजय सेठ ने विदेश मंत्री से आग्रह किया कि राजा कुमार वर्मा के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए विदेश मंत्रालय आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने संबंधित कागजी कार्रवाई और जरूरी औपचारिकताओं को भी जल्द पूरा कराने के लिए आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया।

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संजय सेठ ने विदेश मंत्री से की विशेष पहल की मांग

मुलाकात के दौरान संजय सेठ ने वियतनाम में हुई सड़क दुर्घटना और उसमें राजा कुमार वर्मा की मौत की जानकारी विदेश मंत्री को दी। उन्होंने परिवार की स्थिति को देखते हुए पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने के लिए मंत्रालय से सहयोग मांगा। संजय सेठ ने विदेश मंत्रालय से संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कराने का अनुरोध किया, ताकि परिवार को पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार ज्यादा लंबा न करना पड़े।

जयशंकर ने हर संभव मदद का दिया भरोसा

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संजय सेठ को मामले में हर संभव मदद का आश्वासन दिया। मुलाकात के बाद उम्मीद जताई गई है कि राजा कुमार वर्मा का पार्थिव शरीर शनिवार से पहले भारत पहुंच सकता है। पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी औपचारिकताओं और दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरा किया जाना है। विदेश मंत्रालय की मदद से इन प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कराने की कोशिश की जा रही है।

कौन थे राजा कुमार वर्मा?

राजा कुमार वर्मा योग शिक्षक थे और किसी काम के सिलसिले में वियतनाम में थे। इसी दौरान सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। हादसे की खबर सामने आने के बाद उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई। परिवार के लिए इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाना है, ताकि अंतिम संस्कार और अन्य पारिवारिक परंपराएं पूरी की जा सकें।

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