Bhojpur: भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को 26 वर्षीय भरत तिवारी की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। घटना के तीन महीने से ज्यादा समय बाद भरत के परिजनों ने शाहाबाद रेंज के DIG सत्य प्रकाश से मुलाकात कर मामले में आगे की कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने करीब 45 मिनट की मुलाकात के दौरान अब तक हुई जांच और कार्रवाई की जानकारी ली। परिजनों के साथ सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह भी मौजूद थे। परिवार की ओर से DIG को करीब 100 पन्नों का ज्ञापन और मामले से जुड़े बताए जा रहे दस्तावेज एवं साक्ष्य सौंपे गए। परिजनों का दावा है कि मामले में कुल 11 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि अब तक केवल STF जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी हुई है।
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सभी नामजद आरोपियों पर कार्रवाई की मांग
भरत तिवारी के परिवार ने DIG से मुलाकात के दौरान बाकी नामजद आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की। परिवार की ओर से तत्कालीन SDPO राजेश शर्मा, तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, सुशांत मंडल समेत अन्य लोगों के नाम का उल्लेख करते हुए जांच आगे बढ़ाने की मांग की गई है।
परिवार का आरोप है कि भरत की मौत पुलिस एनकाउंटर में नहीं, बल्कि कथित तौर पर उसे गोली मारे जाने से हुई। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से घटना को आत्मरक्षा और जन सुरक्षा से जुड़ी कार्रवाई बताया गया था। ऐसे में घटना की परिस्थितियों को लेकर परिवार और पुलिस के दावों में अंतर है।
मां ने कहा- बेटे की मौत का न्याय चाहिए
DIG से मुलाकात के बाद भरत की मां आशा देवी ने कहा कि परिवार की मांग है कि घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद से परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है और जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
परिवार ने घटना में गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस वाहन में गोली मारे जाने का भी आरोप
भरत के परिजनों ने आरोप लगाया है कि घायल अवस्था में उसे ले जाते समय पुलिस वाहन के अंदर भी गोली मारी गई थी। परिवार का कहना है कि इस दावे से संबंधित दस्तावेज और कथित साक्ष्य DIG को सौंपे गए हैं।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि घटना के दौरान भरत ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। वहीं, पुलिस की ओर से कार्रवाई को आत्मरक्षा से जोड़कर बताया गया था। दोनों पक्षों के इन दावों की वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्ष से स्पष्ट होगी।
पोस्टमार्टम और वेलोसिटी रिपोर्ट का भी हवाला
परिजनों और उनके अधिवक्ताओं ने भरत की मौत से जुड़े सवालों के संदर्भ में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वेलोसिटी रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। परिवार की ओर से गोली लगने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इन रिपोर्टों और अन्य दस्तावेजों की जांच के आधार पर ही घटना में गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
DIG स्तर पर चल रही मामले की जांच
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के अनुसार, शाहपुर थाना कांड संख्या 178/26 में मामला दर्ज है और जांच की जिम्मेदारी शाहाबाद रेंज के DIG को दी गई है। उन्होंने बताया कि परिवार ने करीब 100 पन्नों का ज्ञापन और उपलब्ध दस्तावेज सौंपकर सभी नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
घटना के बाद मामले को लेकर विवाद बढ़ने पर तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश शर्मा को पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया था। इसके अलावा मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोग का गठन भी किया गया था। भरत के परिजन आयोग के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं।
सितंबर में DM-SP ने भी की थी परिवार से मुलाकात
सितंबर 2026 में भोजपुर के DM मनीष कुमार मीणा और SP अवधेश दीक्षित बिलौटी गांव पहुंचे थे। अधिकारियों ने भरत के माता-पिता से मुलाकात कर मामले से जुड़े बिंदुओं की जानकारी ली थी।
अब DIG से हुई मुलाकात के बाद परिवार को जांच में आगे की कार्रवाई का इंतजार है। परिजनों के मुताबिक DIG ने आश्वासन दिया है कि जांच के दौरान जिन लोगों के खिलाफ साक्ष्य सामने आएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Bharat Tiwari Encounter Case में अब तक की प्रमुख बातें
- 17 जून 2026 को बिलौटी गांव में भरत तिवारी की मौत हुई।
- परिवार ने घटना को कथित पुलिस एनकाउंटर बताया है।
- पुलिस ने कार्रवाई को आत्मरक्षा और जन सुरक्षा से जुड़ा बताया था।
- परिवार के अनुसार मामले में 11 लोग नामजद हैं।
- परिवार का दावा है कि अब तक एक STF जवान की गिरफ्तारी हुई है।
- DIG को करीब 100 पन्नों का ज्ञापन सौंपा गया।
- मामले की जांच DIG स्तर पर चल रही है।
- जांच आयोग के सामने भी परिवार अपना पक्ष रख चुका है।



