Patna: बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर जारी नाराजगी अब खुलकर सामने आती दिख रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कुमर राय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद परिषद चुनाव के लिए RJD के घोषित प्रत्याशियों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। दरभंगा शिक्षक सीट पर राजद का प्रत्याशी उतारना इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि महागठबंधन के शुरुआती सीट बंटवारे में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में मानी जा रही थी। ऐसे में अब इस सीट पर RJD और कांग्रेस के बीच सीधा चुनावी मुकाबला होने की स्थिति बन गई है। इससे गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान भी और गहराती नजर आ रही है।
पहले कांग्रेस के खाते में थी दरभंगा शिक्षक सीट
विधान परिषद चुनाव की तैयारियों के दौरान महागठबंधन में सीटों को लेकर शुरुआती स्तर पर सहमति बनी थी। इसके तहत दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र CPI के लिए छोड़ा गया था। इन दोनों सीटों पर संबंधित दलों का पहले से प्रभाव रहा है। ऐसे में माना जा रहा था कि गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारेंगे और चुनाव में आपसी तालमेल बनाए रखेंगे। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने इस रणनीति को बदल दिया है। RJD की ओर से दरभंगा शिक्षक सीट पर उम्मीदवार की घोषणा के बाद गठबंधन के भीतर दोस्ताना मुकाबले की जगह सीधी राजनीतिक चुनौती की स्थिति बन गई है।
कांग्रेस की उम्मीदवार घोषणा से नाराज था RJD
दरभंगा सीट पर RJD के फैसले के पीछे कांग्रेस की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। कांग्रेस ने हाल ही में विधान परिषद चुनाव के लिए पांच प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे। RJD को कांग्रेस का यह तरीका पसंद नहीं आया। पार्टी की ओर से इसे गठबंधन में आपसी सहमति और समन्वय की भावना के विपरीत माना गया। इसके बाद राजद ने भी अपने रुख में बदलाव करते हुए उस सीट पर प्रत्याशी उतार दिया, जिसे पहले कांग्रेस के हिस्से में माना जा रहा था। अब कुमर राय बनाम कांग्रेस उम्मीदवार का मुकाबला चुनावी तस्वीर को काफी दिलचस्प बना सकता है।
महागठबंधन की एकजुटता पर उठे सवाल
दरभंगा शिक्षक सीट का विवाद केवल एक सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह मामला महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर मौजूद मतभेदों को भी सामने ला रहा है। विधान परिषद चुनाव में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की राजनीति विधानसभा चुनाव से कुछ अलग होती है। यहां शिक्षक संगठनों, स्थानीय समीकरणों, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और लंबे समय से बने राजनीतिक संपर्कों की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में कांग्रेस और RJD के समर्थक अगर अलग-अलग चुनावी रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं, तो इसका सीधा असर वोटों के समीकरण पर पड़ सकता है।
तिरहुत शिक्षक सीट भी अहम
दरभंगा के बाद अब तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। शुरुआती समझ के अनुसार यह सीट CPI के लिए छोड़ी गई थी। ऐसे में RJD के दरभंगा में प्रत्याशी उतारने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आने वाले दिनों में गठबंधन की दूसरी सीटों पर भी इसी तरह नए समीकरण सामने आएंगे। अगर घटक दलों के बीच अलग-अलग सीटों पर आपसी सहमति कमजोर होती है, तो विधान परिषद चुनाव महागठबंधन के लिए सिर्फ चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि गठबंधन प्रबंधन की भी बड़ी परीक्षा बन सकता है।
आगे क्या होगा?
दरभंगा शिक्षक सीट पर RJD के उम्मीदवार की घोषणा के बाद अब कांग्रेस और राजद के बीच राजनीतिक तल्खी बढ़ने की संभावना है। दोनों दलों के स्थानीय संगठन और कार्यकर्ता एक ही सीट पर अपने-अपने उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय होंगे। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत से किसी तरह का समझौता हो पाएगा या फिर दरभंगा शिक्षक सीट पर RJD-कांग्रेस की सीधी लड़ाई ही देखने को मिलेगी।




