- नेमरा के ढेकानाला घाट पर संथाली परंपरा से अंतिम संस्कार, सात किलोमीटर पैदल चलकर अंतिम दर्शन को पहुंचे हजारों लोग
मुकेश रंजन
रांची/नेमरा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की धर्मपत्नी रूपी सोरेन गुरुवार की शाम पंचतत्व में विलीन हो गईं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नम आंखों से अपनी मां को अंतिम विदाई दी। नेमरा स्थित पैतृक आवास पर संथाली परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम धार्मिक रस्में पूरी की गयीं। इसके बाद पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए ढेकानाला घाट ले जाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
ढेकानाला घाट वही स्थान है, जहां दिशोम गुरु शिबू सोरेन का भी अंतिम संस्कार किया गया था। इस कारण अंतिम विदाई का यह स्थल परिवार और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता रहा।
सात किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे लोग
रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए राज्यभर से बड़ी संख्या में लोग नेमरा पहुंचे। भीड़ और वाहनों के दबाव को देखते हुए प्रशासन ने गांव से पहले ही वाहनों को रोकने की व्यवस्था की। लुकैयाटांड़ और धुमकुड़िया भवन के पास पार्किंग की व्यवस्था की गयी, जहां से लोगों को लगभग सात किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री के पैतृक आवास तक पहुंचना पड़ा।
सुरक्षा के साथ सुविधाओं का भी रखा गया ध्यान
शिबू सोरेन के अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी भारी भीड़ के अनुभव को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए। झारखंड सशस्त्र पुलिस की कई कंपनियों को देर रात से ही क्षेत्र में तैनात किया गया था। लोगों की सुविधा के लिए गोला-मुरी मार्ग पर आवश्यक मरम्मत करायी गयी। जगह-जगह तोरण द्वार और बैरिकेडिंग की गयी। मार्ग में रूपी सोरेन की तस्वीरों वाले कटआउट लगाए गए, जिन पर ‘अंतिम जोहार’ और ‘विनम्र श्रद्धांजलि’ के संदेश लिखे थे।
अंतिम विदाई में जुटे दिग्गज
रूपी सोरेन को अंतिम विदाई देने के लिए राज्य सरकार के मंत्री, सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ विधायक तथा विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोग नेमरा पहुंचे। अंतिम संस्कार स्थल पर राजकीय सम्मान और संथाली परंपरा के अनुरूप सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
नेमरा की धरती पर उमड़ा जनसैलाब, संथाली रीति-रिवाजों के बीच हुई अंतिम विदाई और ढेकानाला घाट की भावुक तस्वीरों ने रूपी सोरेन के अंतिम संस्कार को झारखंड के लिए एक मार्मिक क्षण बना दिया।




