- शिबू सोरेन के बाद अब रूपी सोरेन का साया उठा, कोरोना काल से अब तक कई करीबी नेताओं को खो चुके हैं मुख्यमंत्री
मुकेश रंजन
Ranchi : झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन के निजी जीवन और राजनीतिक सफर पर बीते कुछ वर्षों में लगातार दुख और चुनौतियों की छाया रही है। पिता और झामुमो के संस्थापक संरक्षक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के अगस्त 2025 में निधन के बाद अब उनकी मां रूपी सोरेन के निधन ने परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है। रूपी सोरेन का बुधवार शाम रांची के निजी अस्पताल में निधन हुआ। मुख्यमंत्री ने मां को अपना सबसे बड़ा सहारा बताया था।
एक के बाद एक बिछड़ते गए राजनीतिक साथी
हेमंत सोरेन के राजनीतिक सफर में निजी दुखों के साथ-साथ उनके करीबी राजनीतिक सहयोगियों के निधन ने भी बड़ी रिक्तियां पैदा की हैं। वर्ष 2020 में तत्कालीन मंत्री और वरिष्ठ झामुमो नेता हाजी हुसैन अंसारी का निधन हुआ। कोरोना संक्रमण के बाद कार्डियक अरेस्ट से हुई उनकी मृत्यु को हेमंत सोरेन ने अपने लिए व्यक्तिगत क्षति बताया था।
इसके बाद अप्रैल 2023 में शिक्षा एवं उत्पाद मंत्री जगरनाथ महतो का निधन हुआ। ‘टाइगर’ के नाम से लोकप्रिय जगरनाथ महतो झामुमो के जमीनी और मुखर नेताओं में शामिल थे। उनके निधन को मुख्यमंत्री ने अपूरणीय क्षति बताया था।
अगस्त 2025 में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन ने भी सरकार और पार्टी को बड़ा झटका दिया। 62 वर्षीय रामदास सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए गहरा दुख व्यक्त किया था।
हाल में सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से लगा एक और झटका
सितंबर 2026 में मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हुआ। वे मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे और सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं, बल्कि बड़े भाई जैसा बताते हुए उनकी कमी को व्यक्तिगत क्षति कहा था।
सोनू सरकार और पार्टी के कई संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। छात्र संगठनों के साथ सरकार की बातचीत में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन ने झामुमो और सरकार के भीतर एक और महत्वपूर्ण स्थान खाली कर दिया।
सियासत के साथ निजी रिश्तों की भी बड़ी परीक्षा
हेमंत सोरेन के लिए यह दौर केवल राजनीतिक चुनौतियों का नहीं, बल्कि निजी रिश्तों के बिछड़ने का भी रहा है। एक ओर पिता शिबू सोरेन जैसी राजनीतिक विरासत का सहारा समाप्त हुआ, तो दूसरी ओर मां रूपी सोरेन का निधन परिवार के लिए गहरा व्यक्तिगत आघात है। इसी बीच सरकार और संगठन से जुड़े कई अनुभवी चेहरों के चले जाने से झामुमो की राजनीतिक यात्रा में भी नए समीकरण और नई जिम्मेदारियां सामने आई हैं।
ऐसे समय में हेमंत सोरेन के सामने चुनौती केवल सरकार चलाने की नहीं, बल्कि उस राजनीतिक और संगठनात्मक विरासत को आगे बढ़ाने की भी है, जिसे उनके पिता शिबू सोरेन ने दशकों के संघर्ष से खड़ा किया था।




