Ranchi: रांची के सदर अस्पताल में नौ माह की गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मृतका की पहचान डोरंडा की कुसई कॉलोनी निवासी 37 वर्षीय शोभा कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई। उन्होंने डॉक्टरों से जवाब मांगते हुए मरीज को समय पर रिम्स रेफर नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, लापरवाही के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
इमरजेंसी से लेबर रूम भेजी गई थीं शोभा
जानकारी के अनुसार, शोभा कुमारी को शनिवार दोपहर करीब 2:30 बजे पेट और कमर में तेज दर्द होने के बाद सदर अस्पताल लाया गया था। यहां इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें लेबर रूम भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक, अस्पताल लाए जाने के समय गर्भ में बच्चे की हलचल महसूस हो रही थी। लेबर रूम में इलाज के दौरान शाम को शोभा की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें रिम्स रेफर कर दिया। लेकिन परिजनों का कहना है कि लेबर रूम से बाहर निकालने के दौरान ही अस्पताल परिसर में उनकी मौत हो गई। गर्भस्थ शिशु को भी नहीं बचाया जा सका।
मां की मौत से बिलख उठीं तीनों बेटियां
शोभा कुमारी की पहले से तीन बेटियां हैं। मां की मौत की खबर सुनते ही अस्पताल में मौजूद बच्चियां रोने लगीं। बड़ी बेटी आयुषी अपनी मां को खोने के गम में बदहवास हो गई। परिवार की इस दुखद स्थिति को देखकर अस्पताल में मौजूद अन्य लोग भी भावुक हो गए। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आक्रोशित परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। वे इलाज करने वाले डॉक्टर और सिविल सर्जन को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे।
परिजनों का आरोप: दो इंजेक्शन देने के बाद बिगड़ी हालत
मृतका की बेटी आयुषी ने आरोप लगाया कि उनकी मां को अस्पताल में दो इंजेक्शन दिए गए थे। इसके कुछ देर बाद उन्होंने हरकत करना बंद कर दिया। हालांकि, इंजेक्शन और मौत के बीच किसी चिकित्सकीय संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। शोभा की ननद बेबी कुमारी ने भी अस्पताल में इलाज के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब शोभा को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी स्थिति ऐसी नहीं लग रही थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सके। परिजनों ने पूछा कि यदि मरीज की हालत गंभीर थी, तो उन्हें पहले ही रिम्स क्यों नहीं भेजा गया? उनका आरोप है कि समय रहते उचित कदम उठाया जाता, तो शायद मां और बच्चे की जान बच सकती थी।
पुलिस पहुंची, अस्पताल प्रबंधन की प्रतिक्रिया का इंतजार
हंगामे की सूचना मिलने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची। पुलिसकर्मियों ने नाराज परिजनों को समझाकर शांत कराने का प्रयास किया। घटना के संबंध में सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। फिलहाल, शोभा कुमारी और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिजनों ने इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए हैं। मामले में वास्तविक स्थिति सामने आने के लिए घटना की निष्पक्ष जांच और अस्पताल प्रबंधन की स्पष्ट प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।




