Ranchi News: झारखंड में कांग्रेस ने अपने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को मजबूत करने के लिए संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य के 25 संगठनात्मक जिलों में अभियान की निगरानी और संचालन के लिए पांच पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। इन नेताओं को जिला और प्रखंड स्तर पर संगठन के साथ समन्वय बनाने, बूथवार सत्यापन कराने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभियान के तीसरे चरण में 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांवों में चौपाल आयोजित की जाएंगी।
Jharkhand Congress Campaign: बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
कांग्रेस के इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाना और बूथ स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ाना है। AICC महासचिव केसी वेणुगोपाल ने झारखंड के संगठनात्मक जिलों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। पर्यवेक्षकों को अपने-अपने आवंटित जिलों का दौरा कर अभियान की प्रगति की समीक्षा करनी होगी। उन्हें निष्क्रिय संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय करने, पार्टी पदाधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर विवादों का समाधान कराने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा बूथ लेवल एजेंट (BLA) और पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘वोट रक्षक पोर्टल’ के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। बूथवार सत्यापन और जरूरी दस्तावेज तैयार करने पर विशेष जोर रहेगा।
25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गांवों में होंगी चौपालें
अभियान के तीसरे चरण के तहत कांग्रेस गांवों तक पहुंचने की रणनीति बना रही है। इसके लिए 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चौपाल आयोजित करने की योजना है।
कार्यक्रम के तहत प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार होंगी:
- 25 अक्टूबर: जिला मुख्यालयों में प्रेस वार्ता आयोजित करने की योजना।
- जिला और प्रखंड स्तर पर बैठकें: अभियान की रणनीति और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों पर चर्चा।
- बूथवार सत्यापन: BLA और पार्टी कार्यकर्ता मतदाता सूची से संबंधित जानकारी की जांच करेंगे।
- गांवों में चौपाल: स्थानीय लोगों के बीच अभियान के मुद्दे उठाए जाएंगे।
- सोशल मीडिया प्रचार: अभियान से जुड़ी गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी साझा की जाएगी।
कांग्रेस का प्रयास है कि अभियान केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और बूथ स्तर पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़े।
हर सोमवार AICC वॉर रूम को भेजनी होगी रिपोर्ट
AICC ने सभी पर्यवेक्षकों को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी भी दी है। उन्हें प्रत्येक सोमवार को राष्ट्रीय वॉर रूम में जिलावार रिपोर्ट भेजनी होगी। अभियान के अगले चरणों की समीक्षा रिपोर्ट भी निर्धारित समयसीमा के भीतर जमा करनी होगी। कांग्रेस मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को अपने अभियान का प्रमुख मुद्दा बना रही है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग भी उठाई है। ऐसे में झारखंड में चौपालों और बूथ स्तर की गतिविधियों के जरिए इन मुद्दों को जनता तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
झारखंड के इन पांच नेताओं को दूसरे राज्यों में जिम्मेदारी
झारखंड के कुछ कांग्रेस नेताओं को दूसरे राज्यों में भी अभियान से जुड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- जयशंकर पाठक: असम के पांच जिलों के पर्यवेक्षक।
- राजेश कच्छप: बिहार के पांच जिलों की जिम्मेदारी।
- कुमार जयमंगल सिंह: बिहार के पांच जिलों की जिम्मेदारी।
- अजय कुमार: बिहार के पांच जिलों की जिम्मेदारी।
- राजेश ठाकुर: छत्तीसगढ़ के सात जिलों के पर्यवेक्षक।
इस व्यवस्था के जरिए कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में अभियान के संचालन और संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करना चाहती है।
किस पर्यवेक्षक को झारखंड के किन जिलों की जिम्मेदारी?
AICC की ओर से जारी जिम्मेदारियों के अनुसार, झारखंड के 25 संगठनात्मक जिलों को पांच पर्यवेक्षकों के बीच बांटा गया है।
| पर्यवेक्षक | आवंटित जिले |
|---|---|
| अमरजीत भगत | गढ़वा, पलामू, लातेहार, चतरा और बोकारो |
| डॉ. शिवकुमार डहरिया | हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, रामगढ़ और धनबाद |
| राजेश तिवारी | खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और देवघर |
| दिनेश गुर्जर | दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज |
| फूलो देवी नेताम | रांची महानगर, रांची ग्रामीण, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा |
गांवों तक पहुंचने पर रहेगा कांग्रेस का जोर
झारखंड में कांग्रेस का यह अभियान संगठन को बूथ स्तर पर सक्रिय करने और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जनसंपर्क बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। पर्यवेक्षकों की निगरानी, कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण और गांवों में चौपालों के आयोजन से अभियान को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। इसकी प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी इन कार्यक्रमों को कितनी नियमितता से आयोजित करती है और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी कितनी रहती है।




