- धर्मांतरण, डीलिस्टिंग और जनसंख्या नियंत्रण कानून से लेकर आदिवासी जमीन की सुरक्षा तक के मुद्दे उठाए
- जाति प्रमाणपत्र में पिता के साथ पति का नाम जोड़ने की भी मांग
मुकेश रंजन
Ranchi : जनजाति सुरक्षा मंच ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान मुलाकात कर राज्य और देशहित से जुड़े सात सूत्री मांगपत्र सौंपा। मंच ने जनजातीय पहचान, आरक्षण, धार्मिक संस्थानों के वित्तीय प्रबंधन और आदिवासी भूमि अधिकारों से संबंधित मुद्दों पर केंद्र एवं झारखंड सरकार से नीतिगत पहल करने की मांग की।


मंच की सात प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
1. एफसीआरए विधेयक लागू करने की मांग: मंच ने धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों पर नियंत्रण के उद्देश्य से विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े विधेयक को शीघ्र लागू करने की मांग की।
2. मुख्य चुनाव आयुक्त को भारत रत्न: मंच ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का प्रस्ताव रखा।
3. डीलिस्टिंग विधेयक पारित करना: मंच ने धर्म परिवर्तन करने वाले अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ देने संबंधी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए डीलिस्टिंग विधेयक शीघ्र पारित करने की अपील की।
4. जाति प्रमाणपत्र में पति का नाम अनिवार्य करना: मंच ने झारखंड में जाति प्रमाणपत्र पर पिता के साथ पति का नाम दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया। उसका तर्क है कि इससे जनजातीय आरक्षण और संबंधित सुविधाओं के लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
5. दो बच्चों का कानून: मंच ने धर्म, जाति और समुदाय के भेदभाव के बिना सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होने वाला जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने तथा प्रत्येक परिवार के लिए दो बच्चों की सीमा निर्धारित करने की मांग की।
6. धार्मिक संस्थानों की आय का समान नियमन: मंच ने मंदिरों, मस्जिदों और चर्चों में प्राप्त दानराशि के प्रबंधन एवं उपयोग को लेकर समान नियामक व्यवस्था बनाने अथवा संबंधित कानूनों में संशोधन करने की मांग की।
7. आदिवासी जमीन की सुरक्षा: मंच ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) और संताल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी एक्ट) के प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने, जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
मंच ने इन मांगों को जनजातीय अधिकारों, आरक्षण और भूमि संरक्षण से जुड़ा बताते हुए सरकारों से विचार करने की अपील की। इन प्रस्तावों पर आगे की कार्रवाई संबंधित सरकारों के नीतिगत निर्णयों और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।



