पटना: बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणाम को लेकर मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना जारी है। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हुए इस चुनाव में कुल 150 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। शुरुआती रुझानों में तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा समर्थित उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के नीरज कुमार बढ़त बनाते नजर आए। हालांकि, अंतिम नतीजों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
बिहार MLC चुनाव की 8 सीटों पर किसका मुकाबला?
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों के लिए मतगणना हो रही है, उनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
- स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: पटना, दरभंगा, तिरहुत और कोसी।
- शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: पटना, दरभंगा, तिरहुत और सारण।
इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था। मतगणना मंगलवार सुबह 8 बजे शुरू हुई। भाजपा ने चार सीटों पर और उसकी सहयोगी जेडीयू ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। जन सुराज पार्टी भी सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार आगे
मतगणना के शुरुआती रुझानों में तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह बढ़त बनाए हुए थे। लाइव रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे राउंड के बाद उन्हें 1,872 वोट मिले थे, जबकि सीपीआई के संजय सिंह को 1,713 वोट मिले थे। निर्दलीय उम्मीदवार भूषण झा 1,650 वोट के साथ मुकाबले में बने हुए थे। ये आंकड़े शुरुआती मतगणना के हैं, अंतिम परिणाम नहीं।
पटना स्नातक सीट पर JDU के नीरज कुमार को बढ़त
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार भी शुरुआती बढ़त के कारण चर्चा में रहे। 27 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें लगभग 2,708 वोट मिले थे। आरजेडी के दिलीप पटेल 1,811 वोट के साथ दूसरे और जन सुराज पार्टी के अनुज सिंह 671 वोट के साथ तीसरे स्थान पर बताए गए थे। इन आंकड़ों की अंतिम स्थिति आधिकारिक नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मतगणना केंद्र पर व्यवस्था को लेकर विवाद
पटना के बांकीपुर स्थित मतगणना केंद्र पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था को लेकर विवाद की खबर भी सामने आई। कांग्रेस उम्मीदवार संजय यादव और अन्य विपक्षी उम्मीदवारों ने मतगणना हॉल के भीतर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने को लेकर सवाल उठाए। ये उम्मीदवारों की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन्हें किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।



