Ranchi: सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करना कभी-कभी भारी आर्थिक नुकसान की वजह बन सकता है। झारखंड की राजधानी रांची में साइबर ठगी का ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर खुद को लंदन की रहने वाली बताने वाली महिला के झांसे में आकर स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना के अधिकारी प्रकाश कुमार दास ने 3,54,287 रुपये गंवा दिए। ठगों ने विदेशी महिला के भारत आने और मुंबई एयरपोर्ट पर कस्टम संबंधी परेशानी का बहाना बनाकर पीड़ित से अलग-अलग किस्तों में पैसे ट्रांसफर करा लिए। ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने रांची साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
फेसबुक फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ साइबर ठगी का खेल
जानकारी के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत फेसबुक पर हुई दोस्ती से हुई। प्रकाश कुमार दास को ‘रागिना डेसमॉड’ नाम की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। रिक्वेस्ट स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। महिला ने खुद को लंदन का निवासी बताया और धीरे-धीरे पीड़ित का विश्वास जीतने की कोशिश की। कुछ समय तक बातचीत चलने के बाद महिला ने रांची आने की इच्छा जताई। प्रकाश कुमार दास ने शुरुआत में उसे भारत आने से मना किया, लेकिन महिला बार-बार रांची आने और फ्लाइट की टिकट बुक कराने की बात करती रही। इसी दौरान साइबर ठगों ने अपनी योजना को आगे बढ़ाया।
मुंबई एयरपोर्ट के कस्टम अधिकारी बनकर किया फोन
इस साइबर फ्रॉड में 22 अक्टूबर को नया मोड़ आया। पीड़ित के मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई एयरपोर्ट का कस्टम अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि रागिना डेसमॉड भारत पहुंच चुकी है और उसके पास प्रकाश कुमार दास का नाम तथा मोबाइल नंबर मौजूद है। इसके बाद ठगों ने टिकट, लगेज और कस्टम से जुड़ी कथित परेशानियों का हवाला देकर पैसे मांगने शुरू कर दिए। विदेशी महिला से दोस्ती और एयरपोर्ट अधिकारी के फोन पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने यूपीआई के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर दी।
RBI और मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर डराया
शुरुआत में पैसे मिलने के बाद ठगों ने नए-नए बहाने बनाकर रकम की मांग जारी रखी। कभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों का हवाला दिया गया, तो कभी मनी लॉन्ड्रिंग जैसी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। इस तरह अलग-अलग किस्तों में पीड़ित से कुल 3,54,287 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। लगातार पैसों की मांग होने पर प्रकाश कुमार दास को संदेह हुआ। उन्होंने मामले की पड़ताल की, तब उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
रांची साइबर थाने में प्राथमिकी, जांच में जुटी पुलिस
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने रांची साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को फर्जी मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। मामले में पुलिस की जांच जारी है। फिलहाल, आरोपियों की पहचान और ठगी की रकम की बरामदगी को लेकर जांच के नतीजों का इंतजार है।
सोशल मीडिया पर दोस्ती करते समय इन बातों का रखें ध्यान
इस तरह के साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय सतर्क रहना जरूरी है। ठग अक्सर विदेश में रहने वाले व्यक्ति की पहचान अपनाकर दोस्ती करते हैं और बाद में एयरपोर्ट, कस्टम, गिफ्ट या पार्सल के नाम पर पैसे मांगते हैं।
साइबर ठगी से बचने के जरूरी उपाय:
- सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की पहचान की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा न करें।
- एयरपोर्ट, कस्टम या विदेशी पार्सल के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर यूपीआई से पैसे ट्रांसफर न करें।
- RBI, पुलिस या कस्टम अधिकारी बनकर फोन करने वाले व्यक्ति की पहचान आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष: रांची का यह मामला बताता है कि साइबर ठग लोगों का भरोसा जीतने के लिए सोशल मीडिया दोस्ती से लेकर फर्जी सरकारी अधिकारी तक का सहारा ले सकते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों में आकर पैसे भेजने से पहले उसकी पहचान और दावों की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।



