Hazaribagh: झारखंड के हजारीबाग स्थित ओपन जेल में दो पूर्व नक्सलियों ने शादी कर जीवन की नई शुरुआत की है। कभी नक्सली गतिविधियों से जुड़े रहे सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेम्ब्रम ने हिंसा का रास्ता छोड़कर एक साथ जीवन बिताने का फैसला किया। इस विवाह में पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने परिजनों की भूमिका निभाई। अधिकारियों की मौजूदगी में विवाह की रस्में पूरी हुईं और नवदंपती को नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं दी गईं। हालांकि, यह शादी कुछ महीने पहले हुई थी, लेकिन अब इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।
हजारीबाग ओपन जेल में कैसे हुई शादी?
जानकारी के अनुसार, रांची जिले के बुंडू थाना क्षेत्र के बारूहातू गांव निवासी पूर्व नक्सली कमांडर सुरेश सिंह मुंडा और तमाड़ के अराहंगा गांव की रहने वाली सोमवारी हेम्ब्रम ने आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना था। दोनों हजारीबाग की ओपन जेल में रह रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच जीवनसाथी बनने का निर्णय हुआ। उन्होंने जेल प्रशासन के समक्ष विवाह करने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की ओर से शादी की व्यवस्था की गई, ताकि दोनों अपने जीवन का नया अध्याय शुरू कर सकें। बताया जाता है कि राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर विवाह आयोजन की पहल की गई। हजारीबाग के जिला विवाह पदाधिकारी राजेश एक्का ने विवाह की कानूनी प्रक्रिया और पंजीकरण में भूमिका निभाई।
पुलिस और प्रशासन के अधिकारी बने बाराती-घराती
इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि विवाह समारोह में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी ही परिवार के सदस्यों की तरह शामिल हुए। उन्होंने शादी की तैयारियों से लेकर रस्मों तक में सहयोग किया। समारोह के दौरान नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद और उपहार भी दिए गए। अधिकारियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को खास बना दिया। आमतौर पर जेल की चर्चा सुरक्षा और बंदियों से जुड़े मामलों को लेकर होती है, लेकिन इस बार हजारीबाग ओपन जेल एक ऐसी पहल के कारण सुर्खियों में आई, जिसमें दो लोगों को नए जीवन की शुरुआत करने का अवसर मिला। इस विवाह ने यह भी दिखाया कि कानून के दायरे में रहते हुए आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को सामाजिक जीवन में लौटने के लिए सहयोग और अवसर देना कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
नक्सलवाद छोड़ने वालों के पुनर्वास का संदेश
झारखंड लंबे समय से नक्सलवाद की चुनौती का सामना करता रहा है। ऐसे में आत्मसमर्पण करने वाले लोगों का पुनर्वास सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक बदलाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। हजारीबाग ओपन जेल में हुआ यह विवाह इसी दिशा में एक मानवीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने वाले लोगों को परिवार बसाने और समाज से जुड़ने का अवसर मिलना पुनर्वास की प्रक्रिया को नई दिशा दे सकता है। हालांकि, केवल विवाह या किसी एक आयोजन से पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं होती। इसके लिए रोजगार, शिक्षा, सामाजिक स्वीकार्यता और परिवार के साथ सुरक्षित जीवन जीने के अवसर भी जरूरी हैं।
नई जिंदगी की शुरुआत बनी चर्चा का विषय
सुरेश सिंह मुंडा और सोमवारी हेम्ब्रम की शादी की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। इस आयोजन में पुलिस और प्रशासन की भागीदारी ने इसे सामान्य विवाह से अलग पहचान दी है। इस पहल का संदेश साफ है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा रखने वाले लोगों को बेहतर भविष्य बनाने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे प्रयास आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास के साथ-साथ समाज में विश्वास बहाल करने में भी मददगार हो सकते हैं।




