- छत्तीसगढ़ के दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच बलरामपुर जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है। राजपुर विकासखंड की रहने वाली अति जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती ने जिला अस्पताल अंबिकापुर में एक साथ तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। खास बात यह है कि प्रसव के बाद मां और तीनों नवजात फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के दूर-दराज और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच बलरामपुर जिले से एक राहत भरी खबर सामने आई है। राजपुर विकासखंड की रहने वाली अति जोखिम वाली गर्भवती पहाड़ी कोरवा महिला बसंती ने जिला अस्पताल अंबिकापुर में एक साथ तीन स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। खास बात यह है कि प्रसव के बाद मां और तीनों नवजात फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
अति जोखिम वाली गर्भावस्था के कारण थी खास निगरानी
बताया गया कि बसंती की गर्भावस्था को चिकित्सकों ने अति जोखिम वाली श्रेणी में रखा था। ऐसे मामलों में गर्भवती महिला और बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर जांच, इलाज और अस्पताल में प्रसव कराना बेहद जरूरी होता है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बसंती को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया।
दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र से आने वाली बसंती के लिए समय पर अस्पताल तक पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कोशिशों से उन्हें जिला अस्पताल अंबिकापुर तक लाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनका प्रसव कराया गया।
एक साथ तीन बच्चों की किलकारी से अस्पताल में खुशी
प्रसव के बाद जब एक साथ तीन नवजातों के जन्म की जानकारी सामने आई तो परिवार में खुशी का माहौल बन गया। तीनों बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों की टीम नवजातों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अस्पताल में मां बसंती की भी विशेष देखभाल की जा रही है। प्रसव के बाद उनकी सेहत सामान्य बताई जा रही है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल मां और तीनों बच्चों की स्थिति संतोषजनक है।
दूरस्थ इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। खासकर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले मामलों में स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा नियमित निगरानी की जाती है, ताकि किसी तरह की परेशानी होने पर महिला को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके।
बलरामपुर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाकों में यह काम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को कई बार अस्पताल तक पहुंचने में परेशानी होती है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव स्तर पर महिलाओं की पहचान कर उन्हें जरूरी जांच और उपचार से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
बसंती का मामला बना स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता की मिसाल
बसंती का मामला इसी प्रयास का एक उदाहरण माना जा रहा है। समय पर पहचान, अस्पताल तक पहुंच और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख के कारण प्रसव सुरक्षित तरीके से कराया जा सका। फिलहाल मां और तीनों नवजातों को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि दूरस्थ इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए आखिरी समय तक इंतजार न करना पड़े। उन्हें समय रहते अस्पताल तक पहुंचाया जाए, जिससे मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा कम किया जा सके।
मां और तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ
फिलहाल जिला अस्पताल अंबिकापुर में बसंती और उनके तीनों नवजातों की देखभाल की जा रही है। चिकित्सक नियमित रूप से उनकी जांच कर रहे हैं। तीनों बच्चों के स्वस्थ होने से परिवार के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों में भी खुशी है।
दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र की एक अति जोखिम वाली गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव और एक साथ तीन स्वस्थ बच्चों का जन्म स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी राहत की खबर है। इससे यह भी उम्मीद जगी है कि समय पर इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से दूर-दराज के इलाकों में भी गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व की सुविधा मिल सकती है।



