Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल को पत्र लिखकर न्यायपालिका के प्रति उनके रुख, राजनीतिक बयानों और झारखंड सरकार के मामलों में उनकी पैरवी पर सवाल उठाए हैं। मरांडी ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर सिब्बल की कथित प्रतिक्रियाओं से लेकर सरकारी खजाने से किए गए कानूनी खर्च तक का हिसाब मांगा है। उन्होंने जनवरी 2020 से अब तक फीस, कानूनी सलाह और चार्टर्ड विमान पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की है। मरांडी ने अपने पत्र में 21 फरवरी 2024 को लिखे पुराने पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने कई सवाल उठाए थे, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद उन्हें जवाब नहीं मिला। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों और उठाए गए सवालों पर कपिल सिब्बल का पक्ष सामने आना बाकी है।
न्यायपालिका पर रुख को लेकर कपिल सिब्बल से मांगा जवाब
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में कपिल सिब्बल के कानूनी अनुभव और सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका का सम्मान करने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा संविधान और सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर नहीं हो सकती। मरांडी ने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला अपने पक्ष में नहीं आने पर क्या पूरी न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना उचित है? उनके मुताबिक, अदालत में अपने पक्ष को मजबूती से रखना वकील का अधिकार है, लेकिन फैसला प्रतिकूल आने पर न्यायपालिका के प्रति सम्मान बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय संविधान के अनुसार काम करता है। किसी मामले में फैसला संबंधित कानूनी तथ्यों और दलीलों के आधार पर होता है, न कि किसी वकील की प्रतिष्ठा या अपेक्षा के मुताबिक। मरांडी ने सिब्बल से न्यायपालिका के प्रति अपने विचारों को स्पष्ट करने की मांग की है।
पीएमएलए के चार मामलों पर भी उठाए सवाल
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन के साथ कपिल सिब्बल के पॉडकास्ट का भी उल्लेख किया है। उन्होंने अपने खिलाफ चार पीएमएलए मामलों को लेकर किए गए कथित दावों पर आपत्ति जताई है। मरांडी के अनुसार, उन्होंने 23 फरवरी 2024 को सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन किया था। उनका कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज मामले जनांदोलनों से संबंधित थे और उनमें कोई भी प्रेडिकेट ऑफेंस का मामला नहीं था। मरांडी ने दावा किया कि ये मामले अदालतों में टिक नहीं सके और किसी भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं हुई। उन्होंने सवाल किया कि किसी मुवक्किल के पक्ष में माहौल बनाने के लिए यदि किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में भ्रामक जानकारी दी जाती है, तो क्या यह पेशेवर मर्यादाओं के अनुरूप है? उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके अलावा, मरांडी ने हेमंत सोरेन और ईडी अधिकारियों से जुड़े एससी/एसटी एक्ट के मामले का जिक्र करते हुए कानून के कथित राजनीतिक इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। ये सभी बातें मरांडी की ओर से पत्र में उठाए गए आरोप और सवाल हैं।
झारखंड सरकार की पैरवी पर खर्च का हिसाब मांगने की मांग
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार के विभिन्न मामलों में कपिल सिब्बल की पैरवी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार के कानूनी रुख पर आपत्ति जताई। मरांडी का आरोप है कि राज्य सरकार अपने फैसलों का बचाव करने के लिए वरिष्ठ वकीलों की सेवाएं ले रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन मामलों में सरकारी खजाने से कितनी राशि खर्च की गई। उन्होंने जनवरी 2020 से अब तक झारखंड सरकार और संबंधित मामलों में कपिल सिब्बल तथा उनकी कानूनी टीम को किए गए भुगतान का ब्योरा मांगा है।
मरांडी ने मुख्य रूप से इन खर्चों की जानकारी मांगी है:
– कपिल सिब्बल और उनकी टीम को दी गई कानूनी फीस।
– विभिन्न मामलों में कानूनी सलाह पर हुआ खर्च।
– मुकदमों से संबंधित चार्टर्ड विमान के इस्तेमाल पर खर्च की गई राशि।
– झारखंड सरकार से जुड़े मामलों में कुल कान




