Bihar NEET Scam: बायोमेट्रिक से स्कॉलर तक का खेल, EOU ने एक और आरोपी को किया गिरफ्तार

बिहार NEET री-परीक्षा 2026 फर्जीवाड़े में EOU ने प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया। बायोमेट्रिक सिस्टम से स्कॉलर की एंट्री और कई मामलों की जांच जारी है।
EOU ने एक और आरोपी को किया गिरफ्तार
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पटना/लखीसराय: बिहार में NEET री-परीक्षा 2026 के दौरान मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर यानी दूसरे अभ्यर्थियों को बैठाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान लखीसराय निवासी प्रमोद कुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा केंद्र पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था का कथित दुरुपयोग कर फर्जी अभ्यर्थियों को प्रवेश दिलाने की साजिश में उसकी भूमिका सामने आई है। इस मामले में पहले ही कई आरोपियों के नाम सामने आ चुके हैं और जांच का दायरा दूसरे केसों तक भी बढ़ाया गया है।

NEET री-परीक्षा फर्जीवाड़े में कैसे खुली नई कड़ी?

यह मामला 21 जून 2026 को आयोजित NEET री-परीक्षा से जुड़ा है। लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय, खगौर स्थित परीक्षा केंद्र पर मूल परीक्षार्थियों की जगह स्कॉलर के परीक्षा देने पहुंचने का मामला सामने आया था। इसके बाद किउल थाना में कांड संख्या 64/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान परीक्षार्थियों, कथित स्कॉलर, बायोमेट्रिक ऑपरेटरों और सुपरवाइजर समेत कुल 27 नामजद आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। अब प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी के बाद EOU इस कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों की पड़ताल कर रही है।

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बायोमेट्रिक टेंडर से जुड़ा है आरोपी का नाम

EOU के अनुसार, करीब 25 वर्षीय प्रमोद कुमार, पिता महेंद्र यादव, लखीसराय जिले के हलसी थाना क्षेत्र के जहाना गांव का निवासी है। उसे 9 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, पूछताछ में प्रमोद ने बताया कि उसने विकास कुमार और राहुल के माध्यम से लखीसराय में NEET परीक्षा के बायोमेट्रिक कार्य का टेंडर लिया था। आरोप है कि इसके बाद बायोमेट्रिक व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की मदद से मूल अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था की गई। EOU की जांच में मो. शहजाद, सुबोध और रोहित कुमार उर्फ मुरारी के नाम भी सामने आए हैं। एजेंसी इन लोगों की कथित भूमिका और आपसी संपर्कों की जांच कर रही है। हालांकि, मामले में आरोपियों की भूमिका और उनके खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

पहचान सत्यापन की व्यवस्था के कथित दुरुपयोग की जांच

परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परीक्षा देने वाला व्यक्ति वही है, जिसके नाम पर आवेदन किया गया है। लेकिन इस मामले में EOU को संदेह है कि इसी व्यवस्था का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर फर्जी अभ्यर्थियों को प्रवेश दिलाया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बायोमेट्रिक ऑपरेटरों की भूमिका क्या थी, प्रवेश प्रक्रिया में किन स्तरों पर गड़बड़ी हुई और मूल परीक्षार्थियों से संपर्क किस तरह स्थापित किया गया। इस जांच के नतीजे परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन की व्यवस्था और उसकी निगरानी से जुड़े सवालों के लिए भी अहम हो सकते हैं।

NEET फर्जीवाड़े के दो अन्य मामलों से भी जुड़े तार

EOU के अनुसार, प्रमोद कुमार और अन्य आरोपियों की कथित संलिप्तता लखीसराय के कवैया थाना में दर्ज दो अन्य मामलों में भी सामने आई है। ये मामले कांड संख्या 244/2026 और 245/2026 हैं। इन मामलों का उल्लेख सामने आने के बाद जांच एजेंसी आरोपियों के बीच संपर्क और अलग-अलग मामलों में उनकी संभावित भूमिका का मिलान कर रही है। हालांकि, इन मामलों में उनकी संलिप्तता की प्रकृति और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का विस्तृत निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

इस मामले में EOU अब तक की कार्रवाई के तहत पहले गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। वहीं, रोहित कुमार उर्फ मुरारी को नवादा नगर थाना कांड संख्या 610/2026 से इस मामले में रिमांड पर लिया गया है। प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी के बाद एजेंसी उसके बयान, अन्य आरोपियों से कथित संबंधों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

EOU अब पूरे नेटवर्क की तलाश में

NEET री-परीक्षा फर्जीवाड़े की जांच अब केवल परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए कथित स्कॉलर तक सीमित नहीं है। EOU यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस व्यवस्था के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे और कथित तौर पर आर्थिक लाभ किसे मिल रहा था।

जांच के प्रमुख सवाल हैं:

  • मूल अभ्यर्थियों और स्कॉलर के बीच संपर्क कैसे हुआ?
  • बायोमेट्रिक सत्यापन में कथित गड़बड़ी किस तरह की गई?
  • परीक्षा केंद्र की प्रवेश व्यवस्था में किन लोगों की भूमिका थी?
  • क्या अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों के बीच कोई साझा नेटवर्क है?

EOU ने प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा और उससे आर्थिक लाभ कमाने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही है। फिलहाल जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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