Ranchi : इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होने वाले इस पावन पर्व में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
पुरोहित मनोज पांडेय के अनुसार यह पर्व अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। नवरात्रि को नव संवत्सर (हिंदू नववर्ष) की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति जलाकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं।
पहले दिन बन रहा दुर्लभ शुभ योग
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार इस बार नवरात्रि के पहले दिन कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन शुक्ल योग, कलात्मक योग और छत्र योग में कलश स्थापना की जाएगी।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
26 मार्च को महाअष्टमी, 27 को रामनवमी
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु व्रत रखकर दुर्गा पाठ, जप और पूजा-अर्चना करेंगे।
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26 मार्च: महाअष्टमी व्रत
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27 मार्च: महानवमी, कन्या पूजन, हवन और आरती
इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव (रामनवमी) भी मनाया जाएगा।
चैती छठ भी इसी अवधि में
नवरात्रि के दौरान ही Chaiti Chhath का पर्व भी मनाया जाएगा, जो 22 मार्च से 25 मार्च तक चलेगा।
चैती छठ का कार्यक्रम:
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22 मार्च (रविवार): नहाय-खाय
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23 मार्च (सोमवार): खरना
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24 मार्च (मंगलवार): संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को)
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25 मार्च (बुधवार): उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को)
धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र नवरात्रि के दौरान नव संवत्सर, गौरी तृतीया व्रत और चैती छठ जैसे कई महत्वपूर्ण पर्व एक साथ पड़ते हैं। इस दौरान भक्त मां दुर्गा, भगवान सूर्य, भगवान विष्णु के मत्स्यावतार और भगवान श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
इस कारण चैत्र नवरात्रि को वर्ष के सबसे पवित्र और शुभ पर्वों में से एक माना जाता है।

